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महदवियत और ज़हूर: "सभी इलाही धर्मों ने अंतिम समय में मसीहा के आने और वैश्विक न्याय की स्थापना की पेशीन गोई की है"
Mar १८, २०२५ १३:१३तेहरान के आज़ादी टावर पर इमाम महदी (अ.स.) के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 3डी लाइट शो का आयोजन किया गया।
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रमज़ान मोमेनीन के लिए अवसरों का बेमिसाल महीना क्यों है?
Mar ०६, २०२५ १५:१८पार्स टुडे- जब हम इस बात पर विचार करते हैं कि रमज़ान का महीना क़ुरान और इलाही शिक्षाओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह देता है, तो हमें यह एहसास होता है कि रमज़ान जीवन के मार्ग की समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन करने का एक अच्छा समय है।
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(मज़लूम की मदद बेहतरीन अदालत है) पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों की कुछ हदीसें
Mar ०५, २०२५ १३:१७पार्सटुडे- मज़लूम का बचाव बौद्धिक और स्वाभाविक चीज़ है जिस पर इस्लामी रिवायतों में बल दिया गया है।
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महामुक्तिदाता के ज़ुहूर की भूमिका प्रशस्त करने में महिलाओं की भूमिका/ "महदवीयत मेरी सोच है" शीर्षक के अंतर्गत इराक़ में कांफ़्रेन्स
Mar ०३, २०२५ १७:२७पार्सटुडे- इराक़ के दिवानिया प्रांत के क़ादेसिया विश्वविद्यालय में Ahl Al-Bayt World Assembly की ओर से "महदवीयत मेरी सोच" शीर्षक के अंतर्गत एक कांफ़्रेन्स आयोजित की गयी।
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किस किताब को अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की इंजील कहा जाता है?
Feb २७, २०२५ १२:०७पार्सटुडे- चौथे इमाम, इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की एक लिखित रचना व किताब है जो मुसलमानों के मध्य क़ुरआन की बहन, अहलेबैत की इंजील और ज़बूरे आले के नाम से मश्हूर है।
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कौन ज़िन्दगी से सबसे कम आनंद उठाता है?/ पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों की कुछ हदीसें
Feb २६, २०२५ १३:०७पार्सटुडे- हसद व जलन एक बुरी नैतिक बुराई है। हसद का अर्थ यह है कि इंसान उस इंसान से नेअमत के ख़त्म होने की तमन्ना करे जिसे अल्लाह ने कोई नेअमत दे रखी है।
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उम्र के संबंध में माल ख़र्च करने से भी अधिक कंजूस रहो, समय की क़ीमत के बारे में पैग़म्बरे इस्लाम और उनके उत्तराधिकारी की सिफ़ारिश
Feb २५, २०२५ १६:१४पार्सटुडे- इस बात में कोई संदेह नहीं है कि समय इंसान की बहुत बड़ी और अद्वितीय पूंजी है और उसका सही लाभ उठाकर हर क्षेत्र में प्रगति की जा सकती है और भौतिक और आध्यात्मिक प्रगति की बड़ी से बड़ी चोटी को सर किया जा सकता है।
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जवाद आमूलीः क़ुरआन समस्त संदेहों का जवाब देता है, अहलेबैत अलै. के क़ुरआनी ज्ञानकोष की प्रशंसा
Feb २२, २०२५ १५:४८पार्सटुडे- पवित्र क़ुरआन के महान व्याख्याकार ने कहा है कि क़ुरआन ज्ञान व माअरत का कौसर है और उसने समस्त संदेहों का जवाब दिया है।
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(अपनी महिलाओं का सम्मान करो ताकि बिना हिसाब जन्नत में दाख़िल हो) महिलाओं के बारे में हज़रत मोहम्मद स. और उनके पवित्र परिजनों की कुछ हदीसें
Feb २२, २०२५ १४:१०पार्सटुडे- इस्लाम में महिला का स्थान एक अद्वितीय स्थान है और महिलाओं के सम्मान के संबंध में काफ़ी सिफ़ारिशें की गयी हैं।
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(वह इंसान धिक्कारा हुआ है जो अपने पड़ोसी को कष्ट पहुंचाये) पड़ोसी के बारे में हज़रत मोहम्मद स. और उनके पवित्र परिजनों की सिफ़ारिशों पर एक नज़र
Feb २०, २०२५ १५:३६पार्सटुडे- पड़ोसियों के सम्मान का लोगों के सामाजिक जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। आज लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं और उनकी जीवन शैली शहरी हो गयी है। इस बात के दृष्टिगत पड़ोसी और उसके अधिकारों का विषय अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।