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ईरान ने अमरीका की नाक फिर ज़मीन पर रगड़ दी, अरब सागर में पकड़ लिया नया टैंकर, ईरान के इस ताक़तवर जवाब की क्या वजह है?
May ०१, २०२३ १५:४९ईरान की तेज़ रफ़तार सैनिक नौकाओं ने ओमान खाड़ी में अमरीकी तेल टैंकर पकड़ लिया और उसे ईरानी बंदरगाह पर पहुंचा दिया। इससे पहले अमरीका ने ईरान का तेल टैंकर पकड़ लिया था जो चीन जा रहा था।
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देश के मुसलमानों से नफ़रत, विदेशी मुसलमानों से दोस्ती, नए भारत की नई तस्वीर!
Mar १६, २०२३ १८:३५एक ओर भारत में आए दिन धर्म के आधार पर मुसलमानों के साथ मारपीट, लिंचिंग और बुल्डोज़र से उनके घरों को ध्वस्त कर देने की ख़बरे सामने आती रहती हैं तो दूसरी ओर विश्व में मौजूद मुस्लिम और इस्लामी देशों से भारत की सरकार लगातार दोस्ती बढ़ाने का प्रयास करती रहती है। जिसकी बुनियाद पर यह सवाल पैदा होता है कि आख़िर देश के मुसलमानों से नफ़रत क्यों और विदेशी मुसलमानों से इतनी मोहब्बत के पीछे राज़ क्या है?
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ईरान-सऊदी अरब संबंध, साम्राज्यवादियों के ताबूत पर आख़िरी कील....
Mar १२, २०२३ १५:३४अरबी भाषा के एक प्रसिद्ध विश्लेषक और टीकाकार ने ईरान-सऊदी समझौते के इस क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभावों के बारे में आशा व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अरब और इस्लामी देशों की निकटता और तेहरान-रियाज़ संबंधों को पुनर्जीवित किए जाने का अर्थ, क्षेत्र में पश्चिमी और अमरीकी साम्राज्यवाद का अंत है।
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अमेरिकी-पश्चिमी मीडिया द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ छेड़ी गई जंग का क्यों हिस्सा बन रही है भारतीय मीडिया? झूठ को सच और सच को झूठ बनाना सबके लिए है हानिकारक!
Mar ०१, २०२३ १९:३२भारत में आए दिन मिड डे मील खाकर बीमार होने वाले स्कूली बच्चों की ख़बरें सामने आती रहती है, लेकिन कभी भी कोई इन ख़बरों को इस तरह पेश नहीं करता है कि बच्चों को स्कूल जाने से रोकने के लिए मिड डे मील की गुणवत्ता को ख़राब किया गया था। लेकिन अगर ईरान में इस तरह की कोई छोटी सी भी घटना घटती है तो पश्चिमी मीडिया उसे तिल का ताड़ बनाकर पेश करता है।
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हिन्दू राष्ट्र, खालिस्तानी राष्ट्र और इस्लामी राष्ट्र, जब बात निकली है तो बहुत दूर तलक जाएगी ...
Feb २८, २०२३ १९:०१भारत एक लोकतांत्रिक देश है, इसकी ख़ूबसूरती भी अनेकता में एकता के तौर पर मानी जाती है। शायद ही दुनिया का कोई ऐसा देश होगा कि जहां इतनी बड़ी संख्या में विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के मानने वाले रहते हों या फिर इतनी ज़्यादा तादाद में भाषाएं बोली जाती हों। लेकिन इधर कुछ वर्षों से हिन्दू कट्टरपंथियों की ओर से हिन्दुस्तानी गुलिस्तां में मौजूद रंग-बिरंगे फूलों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
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ईरान एक झटके में यूरोपीय देशों के अहंकार को मिट्टी में मिला सकता है, लेकिन ऐसा क्यों नहीं करता इसकी वजह जानकर आप भी करेंगे तारीफ़
Feb २७, २०२३ २०:२२एक ओर अमेरिका के साथ मिलकर यूरोपीय देश लगातार ईरान पर अमानवीय और ग़ैर-क़ानूनी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। साथ ही पाबंदियां लगाने वाले देश यह नहीं सोचते हैं कि इन प्रतिबंधों से कौन लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। वे तो केवल अपनी ताक़त और अहंकार का प्रदर्शन करने में ही अपनी जीत समझते हैं।
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मोदी सरकार में न कोई घोटाला, न दंगा और न ही भ्रष्टाचार, आख़िर यह सब कैसे हुआ संभव! वजह जानकर आप भी रह जाएंगे दंग!
Feb २७, २०२३ १५:४०आजकल भारत की मोदी सरकार की हर ओर तारीफ़ें हो रही हैं, जिस मीडिया चैनल को सुनों, जिस भी समाचार पत्र को पढ़ों और जिस भी सरकारी संस्थओं के अधिकारी से बात करो सबके सब भारत की मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी के शासन की तारीफ़ करते हुए थकते नहीं दिखाई देते हैं। आख़िर यह सब कैसे संभव हुआ, इसके बारे में जानना बहुत ज़रूरी है।
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अक़बा में सुरक्षा शिखर बैठक के नतीजे में क्या वेस्ट बैंक में धधक उठेगी दूसरे इंतेफाज़ा की आग
Feb २६, २०२३ १६:३९रविवार को अक़बा में सुरक्षा शिखर बैठक हो रही है जिसमें मिस्र, फ़िलिस्तीनी प्रशासन, ज़ायोनी शासन, जार्डन और अमरीका के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी भाग ले रहे हैं।
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ईरान की बढ़ती ताक़त ने अमेरिका और पश्चिमी देशों की बढ़ाई धड़कने, नया क्रूज़ मिसाइल और देव हैकल ड्रोन आए सामने, अभी तो यह ट्रेलर है ...
Feb २५, २०२३ १८:२७एक ओर अमेरिका पश्चिमी देशों के साथ मिलकर ईरान पर हर दिन नए-नए और कड़े से कड़ा अमानवीय और ग़ैर-क़ानूनी प्रतिबंध लगा रहा है। लेकिन वहीं दूसरी ओर ईरान इन पाबंदियों को नज़रअंदाज़ करते हुए अपने विकास के सफ़र को जारी रखे हुए है। ख़बरों के अनुसार, इस्लामी गणराज्य ईरान ने 1,650 किमी की रेंज की एक क्रूज़ मिसाइल विकसित कर ली है।
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20 साल जेल, न चला मुक़दमा न हुई सुनवाई, अब मिली रिहाई, मानवाधिकार संगठन इनपर कब करेगा कार्यवाही? सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश सबसे बड़ा तानाशाह!
Feb २५, २०२३ १५:१९दुनिया के सबसे पुराने लोकतांत्रिक देश होने का दावा करना वाला संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाला देश भी है। आज इस धरती का कोई भी कोना नहीं बचा है कि जहां अमेरिका द्वारा अंजाम दिए गए जघन्य अपराधों के निशान न मिलें। उन्हीं निशानियों में से एक “ग्वांतोनामो बे” जेल भी है।