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इस वजह से है यूएई और सऊदी अरब में खींचतान, खतरे में सऊदी अरब की पोज़ीशन, अलकुद्सुलअरबी की दिलचस्प रिपोर्ट
Dec ०४, २०२० १३:४२सऊदी अरब और यूएई के बीच दोस्ती के पीछे दुश्मनी भी पनप रही है। अलकुदसुल अरबी ने इसका जायजा लिया है।
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इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की संख्या में कमी का दावा कितना सही?
Dec ०३, २०२० १९:३१रिपोर्ट है कि वाॅशिंग्टन ने इराक़ से अमरीकी सैनिकों की संख्या में कमी का फ़ैसला कर लिया लेकिन क्षेत्र के लोगों के लिए जो चीज़ अहम है वह अमरीकी सैनिकों की संख्या में कमी नहीं बल्कि उनका पूरी तरह से इलाक़े से निकल जाना है।
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पोम्पियो के बाद कूश्नर का इलाक़े का दौरा! ट्रम्प के शासन के बाक़ी बचे दिनों में वाॅशिंग्टन क्षेत्र में क्या करना चाह रहा है?
Dec ०३, २०२० १८:३८अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब का दुष्ट त्रिकोण इन दिनों जिस तरह की गतिविधियां दिखा रहा है, उससे सिर्फ़ यही लगता है कि क्षेत्र में प्रतिरोध के मोर्चे के ख़िलाफ़ एक नई साज़िश तैयार हो चुकी है।
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दूसरों के लिए गड्ढा खोद रहे नेतनयाहू ख़ुद ही उसमें गिर पड़े! इस्राईल में राजनीतिक उथल-पुथल, दो वर्षों में चौथी बार चुनाव!
Dec ०३, २०२० १५:२४एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है वह ख़ुद ही उसमें गिर जाता है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और यूरोपीय देशों की मदद से जब से अवैध ज़ायोनी शासन अस्तित्व में आया है तब से इस पूरे क्षेत्र में अशांति और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो गई है। साथ ही यह अवैध शासन हमेशा अमेरिका की मदद से इस प्रयास में रहता है कि पश्चिमी एशियाई देशों में कभी भी राजनीतिक स्थिरता न होने पाए। लेकिन इधर दो वर्षों से स्वयं इस्राईल में सबसे ज़्यादा राजनीतिक अस्थिरता देखी जा रही है।
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चार साल बाद फिर मिलेंगे...ट्रम्प ने अभी से 2024 में अपनी उम्मीदवारी का कर दिया एलान...क्या इतनी लंबी योजनाबंदी ट्रम्प के स्वभाव से मेल खाती है?
Dec ०३, २०२० १४:४४ट्रम्प लगातार अलग थगल पड़ते जा रहे हैं और उनके क़रीबी समर्थक भी उनका साथ छोड़ रहे हैं मगर इसके बावजूद उनका कहना है कि 2024 में वह फिर राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे।
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बाइडन ने रूहानी और उनकी टीम को दिया संदेश...हम परमाणु समझौते में लौटेंगे...मगर लगता है कि अब देर हो चुकी है? क्या टारगेट किलिंग की और भी घटनाएं हो सकती हैं?
Dec ०३, २०२० ०६:०५अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने न्यूयार्क टाइम्ज़ अख़बार के माध्यम से ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी को महत्वपूर्ण संदेश भेजा है कि हम परमाणु समझौते में लौट रहे हैं क्योंकि यह समझौता न होगा तो इलाक़े के देश यानी सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र भी परमाणु दौड़ में लग जाएंगे जिसके ख़तरनाक परिणाम होंगे।
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परमाणु केंद्रों का निरीक्षण रोकना, शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या का जवाब!
Dec ०२, २०२० १९:२८ईरान के सांसदों ने बताया है कि शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के जवाब में देश के परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण से अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों को रोकने के लिए एक बिल तैयार किया गया है।
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सऊदी अरब के पास यमन युद्ध को रोकने के अलावा कोई चारा नहीं है
Dec ०२, २०२० १८:३४यमन के मआरिब शहर में यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों की विजयों और त्यागपत्र दे चुकी मंसूर हादी की सरकार के बलों के तितर-बितर हो जाने के बाद सऊदी अरब की सरकार के पास युद्ध को समाप्त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
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यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह को आतंकवादी गुट घोषित करना, एक बड़ी ग़लती होगी, लेकिन क्यों?: थिंक टैंक ब्रूकिंग्स
Dec ०२, २०२० १६:२७एक अमेरिकी थिंक टैंक ने डोनल्ड ट्रम्प प्रशासन के नवीनतम क़दम का विरोध करने का कारण बताते हुए कहा है कि, यमन के जनांदोलन असारुल्लाह को आतंकवादी गुट घोषित करने की व्हाइट हाउस की संभावित योजना एक बड़ी ग़लती होगी।
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लाखों की संख्या में भारत के किसान क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? नया कृषि क़ानून क्या कहता है? नए क़ानून से किसानों के लिए क्या है समस्या?
Dec ०२, २०२० १४:०३भारत के ज़्यादातर किसानों की इस देश के सबसे ग़रीब लोगों में गिनती होती है, लेकिन सरकार की नीतियों ने उन्हें लंबे समय तक खुले बाज़ार की क़ीमतों के नुक़सान से बचाए रखा है। लेकिन इस बीच भारत की मोदी सरकार ने पहले की नीतियों में बदलाव करते हुए एक नया कृषि क़ानून बनाया है। जिस क़ानून को लेकर सरकार यह दावा कर रही है कि नया कृषि क़ानून किसानों को बिचौलियों से मुक्त करेगा, लेकिन किसानों का कहना है कि नए कृषि क़ानून में कुछ ऐसी चीज़ें हैं जो उनको लाभ पहुंचाने के बजाए नुक़सान पहुंचाएगा।