कांवड़ यात्रा, कुंभ से कई गुना अधिक ख़तरनाक होगीः विशेषज्ञ
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विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के दृष्टिगत कांवड़ यात्रा, कुंभ मेले से पांच गुना अधिक ख़तरनाक साबित हो सकती है। 
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ११, २०२१ १७:२८ Asia/Kolkata
  • कांवड़ यात्रा, कुंभ से कई गुना अधिक ख़तरनाक होगीः विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के दृष्टिगत कांवड़ यात्रा, कुंभ मेले से पांच गुना अधिक ख़तरनाक साबित हो सकती है। 

भारतीय संचार माध्यमों के अनुसार भारत के उत्तराखंड राज्य की सरकार जहां पर कांवड़ यात्रा को अनुमति देने पर विचार कर रही है वहीं, विशेषज्ञों ने इस यात्रा को लेकर कड़ी चेतावनी दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के दृष्टिगत कांवड़ यात्रा, कुंभ मेले से पांच गुना अधिक ख़तरनाक सिद्ध हो सकती है।  जानकारों के अनुसार कांवड़ यात्रा में कुंभ मेले की तुलना में कोविड-19 संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक है।

इसका मुख्य कारण यह है कि कांवड़ यात्रा करने वाले भक्तों की संख्या कुंभ में शामिल होने वालों की तुलना में काफी अधिक होने की संभावना है। पिछले वर्षों में कांवड़ यात्रा में भाग लेने वालों की संख्या 2 करोड़ से 5 करोड़ के बीच रही है।उत्तराखंड में में कोरोना की स्थिति पर बारीकी से नज़र रखने वाले सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज़ फाउंडेशन के अनूप नौटियाल का कहना है कि कांवड़ यात्रा कुंभ से कई गुना ज्यादा खतरनाक होगी।

उनका कहना था कि 30 दिनों के कुंभ के दौरान आए 70 लाख लोगों की तुलना में कांवड़ यात्रा में एक पखवाड़े में लगभग 3 से 4 करोड़ तीर्थयात्री हरिद्वार आएंगे।  अनुप नौटियाल के अनुसार कांवड़ यात्रा के बाद फैले कोरोना संक्रमण को राज्य संभाल नहीं पाएगा। इसलिए कोविड -19 की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।

उत्तराखांड राज्य की सबसे बड़ी कोविड फैसिलिटी, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिप्टी मेडिकल सुपिरिटेंडेंट और कोविड केयर सेंटर कोऑर्डिनेटर डॉ एनएस खत्री ने भी कहा है कि एक आदर्श स्थिति में कांवड़ यात्रा से बचना चाहिए।