नामों के परिवर्तन की लहर अब कश्मीर में, क्या है मक़सद?
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भारत नियंत्रित कश्मीर में अधिकारियों ने दर्जनों कालेजों, स्कूलों, सड़कों और सरकारी इमारतों के नाम बदलने के निर्देश जारी किए हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २१, २०२१ ०६:३८ Asia/Kolkata
  • नामों के परिवर्तन की लहर अब कश्मीर में, क्या है मक़सद?

भारत नियंत्रित कश्मीर में अधिकारियों ने दर्जनों कालेजों, स्कूलों, सड़कों और सरकारी इमारतों के नाम बदलने के निर्देश जारी किए हैं।

छह नवंबर को दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम ज़िले में स्थित गवर्नमेंट डिग्री कालेज केलम का नाम बदल कर अलताफ़ मेमोरियल गवर्नमेंट डिग्री कालेज केलम रखा दिया गया।

अलताफ़ अहमद डार कश्मीर में एक पुलिस इंस्पेकटर थे जो 2015 में उत्तरी कश्मीर में एक हमले में मारे गए थे। कश्मीर में अलगाववादी छापामारों के ख़िलाफ़ कार्यवाही में अलताफ़ अहमद की भूमिका महत्वपूर्ण थी।

इसी तरह शोपैयां में एक सरकारी डिग्री कालेज का नाम भी इमतियाज़ अहमद ठाकुर मेमोरियल माडल डिग्री कालेज रखा गया है।

इम्तियाज़ ठाकुर एक भारतीय सैनिक थे और एलीट पैरा कमांडो स्क्वाड का हिस्सा थे। 2010 में वह उत्तरी कश्मीर में अलगाववादियों के हमले में मारे गए थे।

केवल पुलिस अफ़सरों और सैनिकों के नाम ही सरकारी इमारतों के लिए नहीं चुने गए हैं बल्कि साहित्यकारों, गीतकारों और कलाकारों के नाम भी रखे गए हैं।

श्रीनगर में सरकारी सूचना विभाग के आडीटोरियम का नाम बदल कर मशहूर गायिका राज बेगम के नाम पर रख दिया गया। श्रीनगर के बटपुरा में डिग्री कालेज का नाम बदल कर अख़तर मुहयुद्दीन के नाम पर रखा दिया गया। उन्हें 1958 में साहित्य एकेडमी एवार्ड और 1968 में पद्मश्री एवार्ड दिया गया था। उन्होंने बाद में कश्मीरियों पर भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से की जाने वाले कथित ज़्यादतियों पर आपत्ति जताते हुए अपना एवार्ड वापस कर दिया था।

कश्मीर के प्रशासन का कहना है कि नाम बदलने से बच्चों को कश्मीर के असली इतिहास के बारे में बताया जा सकेगा। मगर टीकाकार कहते हैं कि धारा 370 ख़त्म करने के बाद कश्मीर में राष्ट्रवाद के दृष्टिकोण से शासन किया जा रहा है और नाम बदलना भी इसी का हिस्सा है। टीकाकार कहते हैं कि लाठियों के ज़ोर पर नए नाम लागू नहीं किए जा सकते अतीत में भी इस तरह की कोशिशें नाकाम रही हैं।

नेश्नल कान्फ़्रेन्स पार्टी का कहना है कि वह नाम बदलने के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन इस समय जो कुछ हो रहा है वह एकतरफ़ा है और यह एक तरह का धोखा भी है।

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