सरकार पर कटाक्ष करना भारी पड़ा, कलाकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरफ़्तार
अरुणाचल प्रदेश के एक युवा वकील व मानवाधिकार कार्यकर्ता और असम के एक प्रसिद्ध ग्रैफ़िटी कलाकार को अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
उन्हें राज्य की राजधानी ईटानगर की दो सरकारी इमारतों की दीवारों पर उनके द्वारा विरोधस्वरूप बनाई गईं कलाकृतियों के चलते हिरासत में लिया गया है।
स्थानीय ख़बरों के मुताबिक़ पहले अरुणाचल के वकील-कार्यकर्ता इबो मिली को हिरासत में लिया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने बांधों को बढ़ावा देने वाले राज्य सरकार द्वारा बनवाए गए म्यूरल को विरूपित किया। यह चित्र राज्य विधानसभा और सचिवालय की इमारत की बाउंड्री वॉल पर बना हुआ था।
उक्त चित्र अरुणाचल प्रदेश के 50 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी सरकार के जश्न का हिस्सा थे। चित्रों के विभिन्न विषय इस पूर्वोत्तर राज्य की विरासत और इसके विकास क्रम का प्रदर्शन करने के लिए थे।
एक स्थानीय कलाकार के मुताबिक, मिली ने अरुणाचल में बांधों को बढ़ावा देने वाले सरकारी भित्तिचित्र के ऊपर ही विरोध स्वरूप एक भित्तिचित्र बना दिया और ‘No More Dams’ यानी "और बांध नहीं" लिख दिया।
कलाकार ने बताया कि सरकार राज्य में विकास के नाम पर बड़े बांधों के निर्माण की पक्षधर है, लेकिन कई लोग इसके समर्थन में नहीं हैं, क्योंकि अरुणाचल पारिस्थितिकीय तौर पर एक संवेदनशील राज्य है।
ज्ञात रहे कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का परिवार राज्य में कंस्ट्रक्शन के व्यवसाय से जुड़ा है और वह बांध बनाने से जुड़े विवादों का हिस्सा रहा है जिसका सार्वजनिक विरोध भी हुआ है।
स्थानीय खबरें बताती हैं कि मिली को हिरासत में लेने के कुछ ही घंटों बाद अरुणाचल पुलिस की टीम असम के लखीमपुर प्रसिद्ध ग्रैफिटी कलाकार निलिम महंत को गिरफ्तार करने पहुंची।
असम की खबरें बताती हैं कि 27 मार्च को असम पुलिस की मदद से महंत को उनके घर से उठा लिया गया।
नाम न छापने की शर्त पर एक कलाकार ने बताया कि महंत ने अरुणाचल के राज्य पशु मिथुन का एक आदमकद स्केच बनाया था जो प्लास्टिक की बोतलों के ढेर पर चरते हुए नारा दे रहा था कि ‘प्लास्टिक नई घास है। (AK)
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