भारत- रूस समझौते से अमरीका नाराज़, दी धमकी, बताया निराशाजनक
अमरीकी प्रतिबंधों को बाइपास करते हुए रूस से सस्ती दरों पर कच्चा तेल ख़रीदने के लिए एक भुगतान प्रणाली पर भारत के काम करने की खबरों पर अमरीका बहुत नाराज़ है और उसने नई दिल्ली से इतिहास के सही तरफ खड़े होने का आग्रह किया है।
अमरीकी वाणिज्य मंत्री जिना रायमोंडो ने वॉशिंगटन में ऑस्ट्रेलिया के वाणिज्य मंत्री डैन तेहान के साथ बुधवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह टिप्पणी की।
प्रस्तावित रूस-भारत बैंकिंग सहयोग और क्वाड संबंधी दिक्कतों को लेकर द सिडनी मॉनिंग हेराल्ड के सवाल का जवाब देते हुए अमरीकी वाणिज्य मंत्री जिना रायमोंडो ने कहा कि अगर इस तरह की योजना लागू की जाती है तो यह अत्यधिक निराशाजनक होगी।
उन्होंने कहा कि अब इतिहास के सही तरफ खड़े होने का समय आ गया है और अमरीका और दर्जनों अन्य देशों के साथ खड़े होने का समय है, जो यूक्रेन के लोगों की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संप्रभुता के लिए खड़े हैं और जो रूस के राष्ट्रपति पुतिन के युद्ध का समर्थन नहीं कर रहे और न ही उनकी मदद कर रहे हैं।
रायमोंडो ने कहा कि अभी तक इस योजना के विवरण उन्होंने नहीं देखे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र में भू-रणनीतिक माहौल के लिए क्वाड बहुत ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के रूप में हमें यह सुनिश्चित करना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाए गए नियम आधारित दृष्टिकोण को बनाए रखकर साथ काम करें, हम भारत के साथ क्वाड के भीतर और द्विपक्षीय रूप से मिलकर काम करना जारी रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम वह सब कर रहे हैं, जिससे नियम आधारित दृष्टिकोण को जारी रखा जा सके।
अमेरिका के उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह रूस के साथ भारत के निरंतर व्यापार पर अपने समकक्षों के साथ चर्चा करने के लिए भारत में हैं जबकि ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस भी भारत दौरे पर हैं और उन्होंने रूस, यूक्रेन मुद्दे को लेकर अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से बातचीत की।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत सरकार रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए वित्तीय लेनदेन के लिए रूस का केंद्रीय मैसेजिंग सिस्टम एसपीएफएस का इस्तेमाल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। (AK)
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