भारतीय मुसलमानों के लिए क़यामत अब दूर नहीं
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भारत में दशकों से मुसलमान राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हाशिए पर पड़े हैं, लेकिन 2014 में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से हर बुराई और मुसीबत के लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Apr १६, २०२२ १९:२० Asia/Kolkata
  • भारतीय मुसलमानों के लिए क़यामत अब दूर नहीं

भारत में दशकों से मुसलमान राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हाशिए पर पड़े हैं, लेकिन 2014 में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से हर बुराई और मुसीबत के लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है।

हिंदुत्वा संगठन अब खुलकर मुसलमानों के जनसंहार के लिए भूमि प्रशस्त कर रहे हैं और हिंदुओं से इसके लिए तैयार रहने की अपील कर रहे हैं।

आज मुसमलानों के क़त्लेआम की अपील एक सामान्य सी बात बनकर रह गई है।

सरकारी स्तर पर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और उनके घरों को ध्वस्त किया जा रहा है। पीड़ित मुसलमान जब इंसाफ़ के लिए गुहार लगाते हैं तो उन्हीं को मुजरिम ठहराकर उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए जाते हैं।

देश में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत की ताज़ा लहर कर्नाटक राज्य से शुरू हुई है, जहां स्कूलों में पर्दे पर प्रतिबंध के साथ ही सार्वजनिक रूप से मुस्लिम व्यापारियों और दुकानदारों के बहिष्कार की अपील की गई है।

पिछले कुछ दिनों के दौरान, कम से कम 7 राज्यों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हमलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

मुस्लिम बस्तियों में हिंसक भीड़ जुलूस निकालती है और मस्जिदों के सामने भड़काऊ भाषण और गीत बजाए जा रहे हैं।

गोवा राज्य में भगवा झंडे हाथों में लिए भीड़ ठीक इफ़्तार के वक़्त मस्जिद में घुस गई।

जानकारों का मानना है कि यह सब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की निगारनी में हो रहा है, जो 2024 तक आधिकारिक रूप से भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना चाहता है।

आरएसएस का मानना है कि हिंदू राष्ट्र में मुसलमानों या ईसाईयों के लिए कोई जगह नहीं है। इसीलिए या तो उन्हें हिंदू धर्म स्वीकार करना होगा या देश छोड़कर जाना होगा, जो बाक़ी बचेंगे उन्हें हिंदुत्ववादियों के रहम और करम पर ग़ुलामी का जीवन व्यतीत करना होगा।

22 वर्षीय एक हिंदू व्यक्ति ने एक पत्रकार से बात करते हुए कहा कि जब भी वह राष्ट्रवादी गाने सुनता है तो उसे ताक़त का अहसास होता है और अपने चारो ओर मौजूद एक एक मुसलमान को चुनकर मारने की भावना पैदा होती है।

इससे साफ़ ज़ाहिरहै कि भारत में मुसलमानों के नरसंहार की प्रक्रिया काफ़ी पहले से शुरू हो चुकी है।

हालांकि भारतीय मुसलमान क़यामत को अपने बहुत निकट देख रहे हैं, जिसके लिए वे किसी भी तरह तैयार नहीं थे, इसलिए उनकी कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि इस स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया दें। msm