ताजमहल के इतिहास को सामने लाने वाली याचिका ख़ारिज, हाईकोर्ट की फटकार...
भारत के इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने भारतीय जनता पार्टी के एक नेता को उनकी उस याचिका के लिए फटकार लगाई है जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित ताजमहल के भीतर 22 बंद कमरों को खोलने के निर्देश के साथ-साथ इसके कथित ‘वास्तविक इतिहास’ जानने के लिए शोध की अनमुति देने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने इसके साथ ही ताजमहल के इतिहास के बारे में सच को सामने लाने के लिए तथ्यों की जानकारी करने वाली कमेटी का गठन करने की भी मांग वाली यह याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि कृपया जनहित याचिका प्रणाली का मज़ाक न बनाएं। हाईकोर्ट की ओर से कहा गया कि इसमें याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रहा कि उसके कौन से क़ानूनी या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
अदालत ने आगे कहा, ‘जाइए और शोध कीजिए। आप जो मांग रहे हैं वह एक समिति के माध्यम से तथ्यों की खोज करना है। यह आपका अधिकार नहीं है और यह आरटीआई अधिनियम के दायरे में नहीं है।
ज्ञात रहे कि कई दक्षिणपंथी संगठन यह दावा कर चुके हैं कि मुग़ल काल का यह मकबरा अतीत में भगवान शिव का मंदिर था।2017 में भाजपा नेता विनय कटियार ने दावा किया था कि 17वीं शताब्दी के स्मारक ताजमहल का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहां ने एक हिंदु मंदिर को नष्ट करके किया था।
17 अगस्त, 2017 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आगरा की अदालत को बताया था कि ताजमहल कभी मंदिर नहीं था और हमेशा एक मक़बरा रहा है। (AK)
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