रिलीजियोफ़ोबिया को लेकर 'सेलेक्टिव कार्यवाही' पर भारत ने जताई आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत ने कहा कि उनका देश आतंकवाद, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा है और किसी विशेष धर्म से भय को लेकर दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने हेट स्पीट पर एक उच्च स्तरीय संगोष्ठी में कहा कि रिलीजियोफ़ोबिया को लेकर दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें किसी ख़ास धर्म के प्रति डर के ख़िलाफ़ लड़ने के बजाए सभी ग़ैर-अब्राहमिक धर्मों के ख़िलाफ़ मौजूद भय के विरुद्ध भी कार्यवाही करनी चाहिए।
तिरुमूर्ति का कहना था कि सिर्फ़ एक या दो धर्मों को लेकर सेलेक्टिव कार्यवाही नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें समान रूप से ग़ैर-अब्राहमिक धर्मों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
भारतीय दूत ने हेट स्पीच का मुक़ाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हेट स्पीट और शांति के मूल कारणों को संबोधित करने के लिए शिक्षा की भूमिका, शीर्षक अपना भाषण दिया।
उन्होंने कहा कि सभी देशों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जो असल मायनों में लोकतंत्र और बहुलतावाद के सिद्धांतों को बढ़ावा देकर आतंकवाद से लड़ने में मदद करे।
ग़ौरतलब है कि भारत में 2014 में जबसे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार का गठन हुआ है, अल्पसंख्यकों ख़ास तौर पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ नियोजित हमलों और हेट स्पीट में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
भारत में मुसलमानों की मौजूदा स्थिति पर कई बार विश्व समुदाय अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुका है और मोदी सरकार से देश में भेदभाव को ख़त्म करने की अपील कर चुका है। msm
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