बिलक़ीस मामला, भाजपा में बग़ावत, फ़ैसले से नाराज़ हैं कई नेता
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने बिलक़ीस बानों सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले के 11 दोषियों की समय-पूर्व रिहाई को लेकर गुजरात सरकार की आलोचना की है और कहा है कि वे इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने के लिए बात करेंगे।
वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे 80 वर्षीय भाजपा नेता शांता कुमार ने कहा कि गुजरात सरकार को अपना फ़ैसला वापस लेना चाहिए और मामले में दोषी ठहराए गए लोगों को फांसी पर लटका देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोषियों की रिहाई के बारे में सुनकर मेरा सिर शर्म से झुक गया, यह इतिहास के सबसे बर्बर मामलों में से एक था, कोई सरकार दोषियों को इतनी छूट कैसे दे सकती है?
कुमार ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर दोषियों की रिहाई होने को भी शर्मनाक करार दिया।
उन्होंने कहा कि जब विशेष अदालत ने उन्हें उनके अपराध के लिए दोषी ठहराते हुए अपना फ़ैसला सुनाया और उच्च न्यायालय ने बलात्कार और हत्या के लिए उनकी सज़ा को सही ठहराया, तो इसका मतलब है कि यह साबित हो गया है कि उन्होंने जघन्य अपराध किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि मुझे आश्चर्य है कि इतने जघन्य अपराधों के बावजूद उन्हें फांसी नहीं दी गई, अब मुझे यह जानकर और भी आश्चर्य हुआ कि गुजरात सरकार ने एक विशेष प्रावधान का इस्तेमाल करके उन्हें रिहा कर दिया है, यह शर्मनाक है कि आजादी का 75वां साल होने के बावजूद महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं।
शांता कुमार ने कहा कि सज़ा से मिली छूट से इन दोषियों के प्रभाव की सीमा का पता चलता है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि दोषी पाए गए लोग शक्तिशाली हैं क्योंकि उन्हें फांसी नहीं दी गई, इससे सिस्टम में उनकी ताक़त पता चलती है कि उनके लिए नियमों को बदल दिया गया।
उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार को अपनी गलती सुधारनी चाहिए।
वर्ष 2002 में गोधरा में एक ट्रेन में आगजनी की घटना के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बिलकीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था, घटना के समय वह पांच महीने की गर्भवती थीं, मारे गए लोगों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी। (AK)
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