विदेशों में भी उठ रहा है भारत के सीएए का मुद्दा
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार परिषद से कहा कि भारत का संशोधित नागरिकता क़ानून "सीएए", 2019 एक सीमित और केंद्रित क़ानून है जो क्षेत्र में उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है और ‘ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान ज़मीनी वास्तविकताओं’ को ध्यान में रखता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ११, २०२२ १५:२५ Asia/Kolkata
  • विदेशों में भी उठ रहा है भारत के सीएए का मुद्दा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार परिषद से कहा कि भारत का संशोधित नागरिकता क़ानून "सीएए", 2019 एक सीमित और केंद्रित क़ानून है जो क्षेत्र में उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है और ‘ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान ज़मीनी वास्तविकताओं’ को ध्यान में रखता है।

भारत के मानवाधिकारों के मुद्दे पर कुछ देशों ने चिंता जताई है। कुछ सदस्य देशों ने विदेशी अंशदान अधिनियम, 2010 को लेकर भी चिंता जताई। आयरलैंड ने विदेशी अंशदान अधिनियम के क्रियान्वयन पर चिंता व्यक्त की जिसके तहत 6 हज़ार से अधिक ग़ैर सरकारी संगठनों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।

भारत ने कहा कि धन के लेन-देन का ग़लत तरीक़े से माध्यम बदलने और विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों एवं देश के कर क़ानूनों का लगातार उल्लंघन करने समेत अवैध गतिविधियां करने के कारण कुछ नागरिक संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। उसने दोहराया कि इन संस्थाओं को कानून में दायरे में रहकर काम करना चाहिए।

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एफसीआरए के संबंध में सदस्य देशों के सवालों के जवाब में कहा कि कुछ संस्थाओं के खिलाफ उनकी ‘अवैध गतिविधियों के कारण कार्रवाई की गई, जिसमें धन के लेन-देन का गलत तरीके से माध्यम बदलना और भारत के मौजूदा कानूनी प्रावधानों, विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों एवं कर कानूनों का जानबूझकर और निरंतर उल्लंघन किया जाना शामिल है। (AK)

 

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