गुजरात दंगे पर तत्कालीन ब्रिटिश विदेशमंत्री जैक स्ट्रॉ ने क्या कहा?
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जैक स्ट्रॉ उस समय ब्रिटेन के विदेश सचिव थे, जब साल 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan २२, २०२३ ११:१७ Asia/Kolkata
  • गुजरात दंगे पर तत्कालीन ब्रिटिश विदेशमंत्री जैक स्ट्रॉ ने क्या कहा?

जैक स्ट्रॉ उस समय ब्रिटेन के विदेश सचिव थे, जब साल 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे।

वरिष्ठ पत्रकार करण थापर से एक विशेष बातचीत में उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि भारत स्थित ब्रिटिश उच्चायुक्त ने लंदन में विदेश कार्यालय को एक रिपोर्ट भेजी थी जिसमें कहा गया था कि दंगों के दौरान गुजरात में हुईं हत्याओं के लिए ‘नरेंद्र मोदी सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि यह जमीन पर मौजूद लोगों की भावना थी।

स्ट्रॉ ने यह भी कहा है कि 2002 में आरोप और विश्वास, जैसा कि ब्रिटिश उच्चायोग की रिपोर्ट में कहा गया था, नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें दंगे में हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया था।

स्ट्रॉ ने इस बात की भी पुष्टि की है कि उन्हें जो रिपोर्ट मिली है, उसमें कहा गया है कि गुजरात में हुईं हत्याओं में ‘जातीय संहार की सभी विशेषताएं हैं, उन्होंने कहा कि वह इस बारे में वास्तव में बहुत चिंतित थे।

जैक स्ट्रॉ के अनुसार, उच्चायोग की रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद, मैंने तत्कालीन वाजपेयी सरकार और विदेश मंत्री जसवंत सिंह से बात की थी, मुझे यकीन है कि मैंने ऐसा किया था, हालांकि 21 साल बाद उन्हें सरकार और विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया याद नहीं रही।

स्ट्रॉ ने कहा कि वह भारतीय संसद पर दिसम्बर 2001 के हमले को लेकर जसवंत सिंह के साथ लगातार संपर्क में थे जिसकी उन्होंने तब और इस साक्षात्कार में निंदा की।

स्ट्रॉ ने जो भारत को अच्छी तरह से जानते हैं और इस देश में अपना हनीमून और अपनी 40वीं शादी की सालगिरह दोनों बिताया था, कहा कि वह भारत की सांप्रदायिक मुसीबतों के इतिहास से अवगत हैं और इसलिए गुजरात में 2002 की मुसीबतों से निराश लेकिन विशेष रूप से हैरान नहीं थे।

मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों के लिए जिम्मेदार बताने वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर उठे विवाद के बीच भारत ने इसे ‘दुष्प्रचार का एक हिस्सा’ करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि इसमें पूर्वाग्रह, निष्पक्षता की कमी और औपनिवेशिक मानसिकता स्पष्ट रूप से झलकती है।

इस डॉक्यूमेंट्री पर भारत में फिलहाल रोक लगा दी गई है और विभिन्न लोगों द्वारा इससे संबंधित ट्वीट भी हटाए जाने का मामला सामने आया है। (AK)

 

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