भारत,ऑनर किलिंग के आंकड़े दिल दहला देने वाले
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पूरे भारत में तथाकथित ‘ऑनर किलिंग’ की घटनाएं इनके आधिकारिक आंकड़ों और मुख्यधारा के मीडिया द्वारा बताए गए आंकड़ों की तुलना में काफी अधिक होती हैं।
(last modified 2023-04-13T04:35:59+00:00 )
Apr १३, २०२३ १०:०४ Asia/Kolkata
  • भारत,ऑनर किलिंग के आंकड़े दिल दहला देने वाले

पूरे भारत में तथाकथित ‘ऑनर किलिंग’ की घटनाएं इनके आधिकारिक आंकड़ों और मुख्यधारा के मीडिया द्वारा बताए गए आंकड़ों की तुलना में काफी अधिक होती हैं।

इन घटनाओं को कम रिपोर्ट किए जाने के अलावा इन अपराधों को अक्सर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के मौजूदा प्रावधानों के तहत हत्या, चोट पहुंचाना और अपहरण के रूप में दर्ज किया जाता है, जिससे इन अपराधों के वास्तविक कारण और प्रकृति की पहचान करना और उनका अध्ययन करना मुश्किल हो जाता है.

रिपोर्ट के अनुसार, दलित ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स नेटवर्क द्वारा नेशनल काउंसिल फॉर विमेन लीडर्स (एनसीडब्ल्यू) के सहयोग से हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट सात राज्यों- हरियाणा, गुजरात, बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश- में जाति आधारित ऑनर किलिंग की तस्वीर सामने रखती है।

रिपोर्ट में जमीनी स्तर की केस स्टडीज के हवाले से बताया गया है कि भारत में बिना क़ानूनी या सामाजिक उपाय के चलते ‘ऑनर किलिंग’ के दर्ज मामलों में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है।

रिपोर्ट में 2012 से 2021 के बीच के 24 मामलों पर नजर डाली गई है और लगभग सभी मामलों में पीड़ितों/सर्वाइवर्स को रिश्ते या शादी का विरोध करने वाले परिजनों के हाथों अत्यधिक हिंसा का सामना करना पड़ा है।

हालांकि, अध्ययन में केवल उन मामलों को शामिल किया गया है जिनमें परिवार के सदस्यों ने सहमति से बने संबंध या शादी का पता लगने के बाद हिंसा को अंजाम दिया। इस अध्ययन में दो अनोखे मामलों को छोड़ दिया गया जिनमें दलित महिलाओं और कथित प्रभावशाली जाति के पुरुषों के बीच प्रेम संबंध थे।

अध्ययन में कहा गया है कि इन दो मामलों में कथित प्रभावशाली जाति के पुरुषों ने कथित तौर पर दलित समुदाय की महिलाओं को रिश्ते में फंसाया और जब उन्होंने शादी के लिए दबाव डाला, तो उनकी हत्या करने के लिए परिवार और दोस्तों को साथ लिया. इनमें से एक घटना उत्तर प्रदेश और दूसरी तमिलनाडु में हुई।

अध्ययन में कहा गया है कि इन दो मामलों को इस रिपोर्ट से बाहर कर दिया गया है क्योंकि वे स्पष्ट रूप से जाति आधारित यौन हिंसा के मामले हैं और पूरी तरह से ‘सम्मान की ख़ातिर (ऑनर)’ किए गए अपराध नहीं हैं।

रिपोर्ट कहती है कि इस प्रकार की हिंसा के शिकार अधिकांश लोग अनुसूचित जाति समुदायों के सदस्य हैं। कम से कम 20 दलित पुरुषों को उनके साथी के परिवार जो कथित प्रभावशाली जातियों से ताल्लुक रखते थे, द्वारा या तो मार डाला गया या गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। (AK)

 

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