मणिपुर में फिर भड़क उठी हिंसा, कई क्षेत्रों में जारी हैं तनाव
मणिपुर में एक बार फिर रविवार रात और सोमवार को दिन में हिंसा भड़क उठी जिसके बाद राज्य में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। राजधानी इंफाल में सोमवार को मेईतेई और कुकी समुदाय के बीच ताजा झड़पें और तनाव देखे गए।
इंफाल के न्यू चेकॉन इलाके में एक नए बाजार में जगह को लेकर दोनों समुदायों के गुट आपस में भिड़ गए। पुलिस ने कथित तौर पर न्यू चेकॉन में हुई घटना में शामिल होने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा इंफाल पूर्वी जिले में भीड़ ने घरों में आग लगा दी।
कुकी छात्र संगठन के एक सदस्य खोंगसाई ने बताया कि चार घरों में आग लगा दी गई थी और लगभग 40 लोग इस स्थिति से प्रभावित हुए थे। खोंगसाई ने आरोप लगाया कि भीड़ ने एक चर्च, द इंडिपेंडेंट चर्च ऑफ इंडिया, को भी निशाना बनाया। ऐसा आरोप लगाया गया है कि चर्च को मेईतेई समुदाय द्वारा जला दिया गया है।
बढ़ते तनाव ने बड़ी संख्या में कुकी लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए राज्य की राजधानी से पलायन करने के लिए प्रेरित किया है। खोंगसाई ने बताया कि वर्तमान समय में 7 हज़ार से अधिक शरणार्थियों ने मणिपुर में सांप्रदायिक हिंसा के कारण मिजोरम में आश्रय मांगा है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के कारण मणिपुर से 7,500 से अधिक लोग पड़ोसी राज्य मिजोरम भाग गए हैं. पीटीआई ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि कुकी समुदाय के 7 हज़ार 527 लोग सोमवार शाम 5 बजे तक मिजोरम में प्रवेश कर चुके हैं।
कांग्रेस पार्टी के मणिपुर प्रभारी भक्त चरण दास ने हाल ही में द हिंदू को बताया था कि कथित तौर पर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के समर्थन का लाभ उठा रहे अरंबाई तेंगगोल और मेइतेई लीपुन जैसे संगठन भी चर्चों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं।
अरंबाई तेंगगोल का नाम ऐतिहासिक रूप से मणिपुरी राजाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार से लिया गया है. अरंबाई तेंगगोल और मेइतेई लीपुन नामक एक अन्य समूह की उपस्थिति पिछले एक साल में निवासियों द्वारा देखी गई है, खासकर सोशल मीडिया मंचों पर। (AK)
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