उत्तराखंड में हिन्दुत्व का जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया
https://parstoday.ir/hi/news/india-i125498-उत्तराखंड_में_हिन्दुत्व_का_जिन्न_फिर_बोतल_से_बाहर_आ_गया
उत्तराखंड पुलिस ने फ़ैसला किया है कि वह पिछले पांच सालों में राज्य में हुए सभी अंतरधार्मिक विवाहों की जांच करेगी और पता लगाएगी कि कहीं उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम- 2022 का कोई उल्लंघन तो नहीं हुआ है।
(last modified 2023-06-17T23:38:22+00:00 )
Jun १८, २०२३ ०५:०६ Asia/Kolkata
  • उत्तराखंड में हिन्दुत्व का जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया

उत्तराखंड पुलिस ने फ़ैसला किया है कि वह पिछले पांच सालों में राज्य में हुए सभी अंतरधार्मिक विवाहों की जांच करेगी और पता लगाएगी कि कहीं उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम- 2022 का कोई उल्लंघन तो नहीं हुआ है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इसकी पुष्टि करते हुए एडीजी वी. मुरुगेशन ने बताया कि हमने इस कदम के बारे में सभी 13 ज़िलों के एसएसपी और एसपी को लिखा है।

उन्होंने कहा कि क़ानून का कोई उल्लंघन पाए जाने की स्थिति में उल्लंघनकर्ता के मूल धर्म और परिवर्तित धर्म की परवाह किए बिना संबंधित ज़िला पुलिस द्वारा उचित कार्रवाई की जाएगी।

उच्च स्तरीय सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस नियम में ऐसी सभी शादियों को शामिल किया जाएगा जो 2018 में क़ानून के लागू होने के बाद हुई हैं।

पांच साल पहले जब यह कानून लागू हुआ था तो यह अनिवार्य किया गया था कि धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को धर्मांतरण से कम से कम एक माह पहले क्षेत्र के ज़िला मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देनी होगी। व्यक्ति के धर्मांतरण के अलावा, अधिनियम में धर्मांतरण कराने वाले धार्मिक व्यक्ति के लिए भी समान प्रावधान अनिवार्य थे.

पिछले साल 21 दिसम्बर को क़ानून में किए गए संशोधन ने जबरन धर्मांतरण के लिए सज़ा को और भी कठोर बना दिया था और इसे संज्ञेय व गैर जमानती अपराध बना दिया था, जिसमें 10 साल तक कारावास और 50 हज़ार रुपये जुर्माने की बात थी।

मामले के जानकार राज्य के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस नियम के एक हिस्से के तौर पर पुलिस यह जांच करेगी कि क्या किसी अन्य धर्म के व्यक्ति के साथ शादी करने वाले व्यक्ति ने अपना धर्म बदला है, अगर हां, तो क्या उसने कानून के तहत तय मापदंडों का पालन किया या फिर उन पर उनके साथी ने धर्म परिवर्तित करने का दबाव बनाया?

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा पाया जाता है कि प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ था, तो पुलिस आरोपियों के ख़िलाफ कार्रवाई करेगी, बिना यह विचार किए कि वह कितने समय से शादीशुदा हैं, अगर ऐसा पाया जाता है कि जबरन धर्मांतरण हुआ था तो उन लोगों के ख़िलाफ ज़रूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो इसके पीछे रहे।

अधिकारी ने इस ओर भी संकेत किया कि 2018 में कानून के लागू होने के बाद से इसके उल्लंघन के लिए इस साल के 15 जून तक 18 मामले दर्ज किए गए हैं। (AK)

 

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए 

फेसबुक पर हमारे पेज को लाइक करें