यूसीसी का विरोध जारी, इस बार मिज़ोरम से उठी आवाज़
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मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने भारत के विधि आयोग को पत्र लिखकर कहा कि समान नागरिक संहिता "यूसीसी" सामान्य रूप से जातीय अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से मिज़ो समुदाय के हितों के ख़िलाफ़ है।
(last modified 2023-07-05T23:30:08+00:00 )
Jul ०६, २०२३ ०४:५७ Asia/Kolkata
  • यूसीसी का विरोध जारी, इस बार मिज़ोरम से उठी आवाज़

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने भारत के विधि आयोग को पत्र लिखकर कहा कि समान नागरिक संहिता "यूसीसी" सामान्य रूप से जातीय अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से मिज़ो समुदाय के हितों के ख़िलाफ़ है।

जोरामथांगा सत्तारूढ़ मिज़ो नेशनल फ्रंट "एमएनएफ" के भी अध्यक्ष हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि यूसीसी मिज़ो समुदाय के धार्मिक व सामाजिक रीति-रिवाजों और संविधान की धारा 371 (जी) द्वारा संरक्षित उनके पारंपरिक क़ानूनों के विरुद्ध है।

एमएनएफ़ भाजपा के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस "एनईडीए" का एक घटक दल है जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन "एनडीए" का क्षेत्रीय संस्करण है.

ज्ञात रहे कि इससे पहले मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा भी कह चुके हैं कि यूसीसी अपने मौजूदा स्वरूप में भारत की भावना के खिलाफ है। संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी "एनपीपी" भी एनईडीए की सदस्य है।

जोरामथांगा ने अपने पत्र में लिखा कि पूरे भारत में यूसीसी का प्रस्तावित कार्यान्वयन मिजो समुदाय की धार्मिक व सामाजिक प्रथाओं और उनके पारंपरिक/व्यक्तिगत क़ानून के विपरीत है जिन्हें विशेष रूप से संवैधानिक प्रावधानों द्वारा संरक्षित किया गया है, इसलिए केंद्र की एनडीए सरकार का उक्त प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता।

बता दें कि विधि आयोग ने पिछले महीने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर ‘व्यक्तिगत क़ानूनों की समीक्षा’ विषय के तहत यूसीसी पर विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकारी की नीतियों और कार्यक्रमों का तब तक समर्थन करता है, जब तक कि वे जनता के लिए लाभकारी हैं और विशेष तौर पर देश के जातीय अल्पसंख्यकों के लिए लाभकारी हैं।

इस बीच राज्य में चर्च के नेताओं के निकाय मिज़ोरम कोहरान ह्रुएतुते समिति (एमकेएचसी) ने भी केंद्रीय विधि आयोग को लिखा है कि वह देश में यूसीसी के लागू होने का कड़ा विरोध करती है।

इससे पहले उत्तर पूर्वी राज्य नगालैंड में सेंट्रल नगालैंड ट्राइब्स काउंसिल (सीएनटीसी) भी विधि आयोग को लिखे पत्र में कह चुका है कि संविधान भारत के लोगों के बीच विविधता और बहुलता को मान्यता देता है और इसलिए यूसीसी अपने वर्तमान स्वरूप में भारत के विचार के ख़िलाफ़ है। (AK)

 

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