क्या मणिपुर हिंसा केन्द्रीय गृह सचिव के आदेश के बाद फैली?
मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने से कुछ दिन पहले केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने मणिपुर और मिज़ोरम की सरकारों से ‘अवैध प्रवासियों के बायोग्राफ़िक और बायोमेट्रिक विवरण’ जुटाने के लिए कहा था।
इस बायोमेट्रिक विवरण में आंख के रेटिना व आइरिस और उंगलियों के निशान भी शामिल हैं। द हिंदु की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने बीते 22 जून के पत्र में भी राज्यों को 30 सितम्बर तक यह अभ्यास पूरा करने की याद दिलाई थी।
पिछले 28 अप्रैल को भल्ला ने म्यांमार के साथ सीमा साझा करने वाले दोनों राज्यों में अवैध प्रवासियों से संबंधित जानकारी एकत्र करने पर एक बैठक की अध्यक्षता की थी।
ज्ञात हो कि मणिपुर में मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा 3 मई को भड़क उठी थी, जिसमें 140 से अधिक लोग मारे गए हैं और 54 हज़ार से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं।
फ़रवरी 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद पड़ोसी देश के 40 हज़ार से अधिक शरणार्थियों ने मिज़ोरम में शरण ली है और कहा जाता है कि लगभग 4 हज़ार शरणार्थी मणिपुर में प्रवेश कर चुके हैं।
भारत और म्यांमार के बी 1 हज़ार 643 किलोमीटर लंबी संयुक्त सीमा है और दोनों तरफ़ के लोगों के बीच पारिवारिक संबंध हैं। मिज़ोरम सरकार ने शरणार्थियों के लिए राहत शिविरों की भी व्यवस्था की थी। (AK)
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