मणिपुर पर सहयोगी दलों को भी नहीं बोलने दिया भाजपा ने
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लोकसभा की बाहरी मणिपुर निर्वाचन सीट से सांसद लोरहो एस.फोज़े का कहना है कि वे विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान सदन में मणिपुर पर बोलना चाहते थे, लेकिन ‘गठबंधन में उनके दोस्तों, विशेषकर भाजपा ने उन्हें अनौपचारिक रूप से इस पर न बोलने की सलाह दी।
(last modified 2023-08-14T00:32:22+00:00 )
Aug १४, २०२३ ०६:०१ Asia/Kolkata
  • मणिपुर पर सहयोगी दलों को भी नहीं बोलने दिया भाजपा ने

लोकसभा की बाहरी मणिपुर निर्वाचन सीट से सांसद लोरहो एस.फोज़े का कहना है कि वे विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान सदन में मणिपुर पर बोलना चाहते थे, लेकिन ‘गठबंधन में उनके दोस्तों, विशेषकर भाजपा ने उन्हें अनौपचारिक रूप से इस पर न बोलने की सलाह दी।

फोज़े नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के नेता हैं जो भाजपा की सहयोगी पार्टी है। उन्होंने यह टिप्पणी द हिंदू से बातचीत में की।

मणिपुर में सौ दिन से अधिक समय से जारी जातीय संघर्ष में फोज़े के निर्वाचन क्षेत्र में खासी हिंसा हुई है। उन्होंने अख़बार से कहा कि वे अपने मतदाताओं और भारत के लोगों को बताना चाहते थे कि इस हिंसा को रोका जाना चाहिए और सरकार सामान्य स्थिति और शांति वापस लाने के लिए गंभीर है।

उन्होंने कहा कि मणिपुर में पीड़ित अधिकांश लोग, विशेष रूप से कुकी-ज़ो समुदाय के उनके क्षेत्र से थे, साथ ही उनके निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले तीन अन्य जिलों के कुछ हिस्सों में मेईतेई लोग भी रहते थे।

फोज़े ने कहा कि उन्हें पता था कि मुख्य रूप से मणिपुर के मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव आने वाला है और वह इस पर सदन में बोलना चाहते थे। मैं अलग-अलग लोगों से बात कर रहा था। गठबंधन समूह के मेरे दोस्त, खासकर भाजपा के, उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह जी मणिपुर पर काफी बोलेंगे और इसलिए सलाह यही है कि आप न बोलें।

फोज़े ने कहा कि उन्होंने इसके बाद औपचारिक रूप से अध्यक्ष से बोलने का मौका नहीं मांगा क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं चाहूं भी तो मुझे ऐसा नहीं करने जाएगा।

फोज़े के यह भी कहा कि हम केवल यह उम्मीद करते हैं कि सरकार लोगों की भावनात्मक जरूरतों पर प्रतिक्रिया में थोड़ी अधिक संवेदनशील होगी, हम तो बस यही चाहते हैं कि सरकार जल्द ही कुछ करे, कुछ ऐसा, जिससे स्थिति सामान्य हो जाए या कम से कम हिंसा तो रुके। (AK)

 

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