क्या सच में भारत में "लोकतंत्र में गिरावट" आई, आईबी करेगी जांच
भारत में अकादमिक स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों के बीच इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने हरियाणा के अशोका विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के एक पूर्व प्रोफेसर द्वारा 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर लिखे गए ‘डेमोक्रेटिक बैकस्लाइडिंग इन द वर्ल्ड्स लारजेस्ट डेमोक्रेसी’ नाम के रिसर्च पेपर की जांच शुरू कर दी है।
बताया गया है कि आईबी इसके लेखक सब्यसाची दास का साक्षात्कार लेना और इस बारे में अर्थशास्त्र विभाग के फैकल्टी सदस्यों से बात करना चाहती है।
आईबी के अधिकारी अख़बारों की खबर की कुछ कतरनों के साथ सोमवार को सोनीपत स्थित यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचे थे और उन्होंने दास से मिलने की इच्छा जाहिर की थी। दास पुणे में हैं। अधिकारियों ने दास के रिसर्च पेपर की सामग्री को लेकर अन्य फैकल्टी सदस्यों से बात करने का सुझाव रखा, पर इस पर कोई राज़ी नहीं हुआ क्योंकि अधिकारियों ने इस बारे में उनके आग्रह को लिखित में देने से इनकार कर दिया।
सब्यसाची के शोध पत्र में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों में ‘हेरफेर’ की संभावना जताई थी। भाजपा इस आम चुनाव में 2014 की तुलना में अधिक सीटों के साथ सत्ता में वापस आई थी।
सब्यसाची दास ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि 25 जुलाई, 2023 के उनके पेपर ‘डेमोक्रेटिक बैकस्लाइडिंग इन द वर्ल्डस लारजेंस्ट डेमोक्रेसी’ में उन्होंने जिन तरीकों और प्रभावों को देखा, वे केवल 11 सीटों तक ही सीमित थे, हालांकि उनके अध्ययन ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उनके निष्कर्षों को लेकर उन पर निशाना साधा था।
कुछ उद्योगपति, जिन्होंने यूनिवर्सिटी में निवेश किया है और जो इसके बोर्ड के सदस्य हैं, उन्हें पीएमओ और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से नाराजगी भरे फोन कॉल आए थे, जिनमें दास के मकसद को लेकर सवाल किए गए थे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब इस अपुष्ट खबरें आ रही हैं कि यूनिवर्सिटी इस्तीफ़ा दे चुके सब्यसाची दास को वापस बुलाने वाली है। (AK)
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