भारतः धारा 144 के बावजूद यात्रा निकालने पर अड़े चरमपंथी हिंदूवादी संगठन
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भारत में हरियाणा राज्य के नूंह इलाक़े में चरमपंथी हिंदू संगठनों ने प्रशासन की अनुमति के बग़ैर यात्रा निकालने की घोषणा कर दी है।
(last modified 2023-08-27T10:26:38+00:00 )
Aug २७, २०२३ १५:५१ Asia/Kolkata
  • भारतः धारा 144 के बावजूद यात्रा निकालने पर अड़े चरमपंथी हिंदूवादी संगठन

भारत में हरियाणा राज्य के नूंह इलाक़े में चरमपंथी हिंदू संगठनों ने प्रशासन की अनुमति के बग़ैर यात्रा निकालने की घोषणा कर दी है।

भारतीय मीडिया में आए समाचार के अनुसार राज्य की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने कहा कि 28 अगस्त को नूंह में दोबारा ब्रजमंडल यात्रा निकालने की परमिशन नहीं दी गई है, नूंह में एक महीना पहले ही हिंसक घटना हुई है, उसको लेकर सावधानी रखने की जरूरत है, मंदिरों में पूजा-अर्चना करना सबका अधिकार है। उन्हें श्रद्धा के अनुसार छूट मिलनी चाहिए।

खट्टर ने ये भी कहा कि हमने लोगों से अपील भी की है कि वे नूंह की तरफ यात्रा करने से बचें और अपने नजदीकी मंदिरों में ही जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करें। सुरक्षा रखना सरकार का दायित्व है। लॉ एंड ऑर्डर बना रहे, यह सरकार की कोशिश है।

रविवार को ही नूंह में धारा 144 लगा दी गई। स्कूल-कॉलेज और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 28 अगस्त तक बंद हैं। पुलिस ड्रोन से निगरानी कर रही है।

मगर चरमपंथी हिंदूवादी संगठन विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि 28 अगस्त को सुबह 11 बजे यात्रा की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि यात्रा की परमिशन लेने का सवाल ही नहीं उठता, 28 को सावन का आखिरी सोमवार है और हर श्रद्धालु का अधिकार है कि वह अपने इष्ट का जलाभिषेक करे।

उन्होंने कहा कि यह एक धर्मपरायण देश है, यहां किसी भी यात्रा के लिए परमिशन नहीं ली जाती। बंसल ने सवाल किया कि क्या कभी कुंभ के लिए परमिशन ली जाती है?

VHP नेता आलोक कुमार ने कहा है कि 31 जुलाई को यात्रा बीच में छूट गई थी। उसे सावन के सोमवार को पूरा करना जरूरी है। 28 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार है। हमें मालूम हैं कि नूंह में G-20 देशों की मीटिंग होने वाली है जिसमें 27 देशों के लोग आ रहे हैं। मेवात का इलाका संवेदनशील है इसलिए हम उस यात्रा को छोटा करेंगे, लेकिन छोड़ेंगे नहीं।

इससे पहले 31 जुलाई को यात्रा के दौरान चरमपंथी संगठनों की ओर से उत्तेजक कार्यवाहियां की गई थीं और हालात बहुत बिगड़ गए थे। कई लोगों की हत्याएं भी हो गई थीं।

अब अगर चरमपंथियों ने अपनी ज़िद न छोड़ी तो प्रशासन को डर है कि हालात फिर से ख़राब हो सकते हैं।

वैसे भी भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार पर आरोप है कि वह जान बूझकर सांप्रदायिक तनाव फैलाती है।

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