सुप्रीम कोर्ट का आदेश, ईडी को अपने कामकाज में पारदर्शी होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ईडी को अपने कामकाज में पारदर्शी होना चाहिए और आरोपी को उसकी गिरफ़्तारी का आधार लिखित रूप में प्रस्तुत करना चाहिए।
जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि हम मानते हैं कि अब से यह आवश्यक होगा कि गिरफ़्तारी के लिखित आधार की एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को बिना किसी अपवाद के प्रदान की जाए।
शीर्ष अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रियल एस्टेट समूह एम3एम के निदेशकों पंकज बंसल और बसंत बंसल की गिरफ्तारी को भी रद्द कर उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। न्यायाधीशों ने कहा कि ईडी के आचरण में ‘मनमानेपन की बू आ रही है।
अदालत ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार को लिखित रूप में नहीं देने और इसके बजाय उन्हें पढ़कर सुनाने के दृष्टिकोण के लिए एजेंसी की आलोचना की।
पीठ ने कहा कि ईडी को ‘पारदर्शी होना चाहिए और कार्रवाई में निष्पक्षता के मानकों के अनुरूप होना चाहिए, इसे अत्यंत ईमानदारी के साथ कार्य करते हुए देखा जाना चाहिए और इसके प्रतिशोधी होने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। न्यायाधीशों ने कहा कि केवल रिमांड का आदेश पारित करना गिरफ्तारी को वैध बनाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
ज्ञात रहे कि नरेंद्र मोदी सरकार के तहत ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम में संशोधन के माध्यम से असाधारण शक्तियां प्रदान की गई हैं। आलोचकों का कहना है कि एजेंसी को भाजपा के राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए शक्ति का दुरुपयोग करने की अनुमति मिलती है। (AK)
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