भारतः केन्द्र सरकार से वार्ता के लिए तीन नगा संगठनों में समझौता
भारत के नगालैंड के तीन संगठनों ने समझौता किया है कि दशकों से चले आ रहे विवाद को निपटाने के लिए वे एक साथ मिलकर भारत की केन्द्र सरकार से बात करेंगे।
इन संगठनों में एक नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आफ़ नगालैंड है जिसका नेतृत्व अकातो चौफे करते हैं, दूसरा संगठन एनएससीएन है जिसका नेतृत्व खांगो करते हैंऔर तीसरा संगठन नगा नेशनल काउंसिल है जिसका नेतृत्व ज़ेड रोइम के हाथ में है यह तीनों नगालैंड के प्रभावशील गुट समझे जाते हैं।
तीनों संगठनों के नेताओं की बैठक में यह फ़ैसला किया गया कि वे अपने मसलों पर केन्द्र सरकार से बात करेंगे।
अकातो ने कहा कि तीनों संगठनों ने फ़ैसला किया है कि वे संयुक्त राजनैतिक शक्ति तैयार करने के लिए एकजुट हो जाएंगे।
पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्होंने वार्ता के बारे में अपने रूजहान से केन्द्र सरकार को अवगत करा दिया है तो उन्होंने जवाब दिया कि अतीत में हम अलग अलग तौर पर अप्रोच करते रहे हैं और अब हम मिलकर नगा के मुद्दे को आगे ले जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्र सरकार से बात करने के साथ ही एनएनपीजी की वर्किंग कमेटी से भी अलग से बातचीत करेंगे।
उनका कहना था कि एनएनपीजी भी कई संगठनों का समूह है लेकिन बहुत से संगठन इसमें शामिल नहीं हैं। अकातो ने कहा कि हम केन्द्र सरकार से राजनैतिक बातचीत करेंगे।
भारत के नागालैंड में लम्बे समय से उग्रवाद का मसला चल रहा है और सरकार अलग अलग संगठनों से वर्ष 1997 से बातचीत कर रही है। 3 अगस्त 2015 को फ़्रेमवर्क समझौता हुआ था जिसका अब आठ साल गुज़र गए हैं, नवम्बर 2017 में भी सरकार और एनएपीजी के साथ समझौता हुआ।
नगा संगठनों की मांग है कि उनका राष्ट्र ध्वज अलग होगा और उनका संविधान भी अगल होगा जबकि चार राज्यों में फैली नागा आबादी को मिलाकर अखंड इलाक़ा बनाया जाए।
केन्द्र सरकार और नागा संगठनों के बीच इन मुद्दों पर बातचीत में कोई बड़ी प्रगति नहीं हो सकी है।
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