अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा का चारों शंकराचार्यों ने किया विरोध, बताया राजनैतिक मुद्दा
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पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग न लेने के अपने रुख़ को दोहराते हुए कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में राजनीतिक हस्तक्षेप उचित नहीं है और यहां तक कि संविधान भी इसकी अनुमति नहीं देता है।
(last modified 2024-01-14T09:34:47+00:00 )
Jan १४, २०२४ १४:२१ Asia/Kolkata
  • अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा का चारों शंकराचार्यों ने किया विरोध, बताया राजनैतिक मुद्दा

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग न लेने के अपने रुख़ को दोहराते हुए कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में राजनीतिक हस्तक्षेप उचित नहीं है और यहां तक कि संविधान भी इसकी अनुमति नहीं देता है।

शंकराचार्य ने कहा कि राजनेताओं की अपनी सीमाएं हैं और संविधान के तहत उनकी ज़िम्मेदारियां हैं, धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में नियम और प्रतिबंध हैं और इन नियमों का पालन किया जाना चाहिए, नेताओं द्वारा हर क्षेत्र में हस्तक्षेप करना पागलपन है, संविधान के अनुसार भी यह एक जघन्य अपराध है।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पुरी शंकराचार्य ने ये टिप्पणी पश्चिम बंगाल के गंगा सागर मेले में की, जहां वह मकर संक्रांति के अवसर पर वार्षिक अनुष्ठान स्नान में भाग लेने गये थे।

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक शंकराचार्य के तौर पर उनकी भी कुछ सीमाएं हैं कि वह कहां जा सकते हैं, किस चीज में हस्तक्षेप कर सकते हैं और क्या खा सकते हैं।

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनके अनुसार जहां तक ‘मूर्ति प्रतिष्ठा’ का सवाल है तो शास्त्रों के अनुसार निर्धारित नियम हैं और राज्य के प्रमुख या प्रधानमंत्री को इन नियमों का पालन करना होता है।

उन्होंने कहा कि किसी के नाम का प्रचार करने के लिए इन नियमों को तोड़ना भगवान के ख़िलाफ़ विद्रोह है और विनाश के रास्ते पर जाना है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अयोध्या से नाराज़ नहीं हैं और वह वहां जाते रहते हैं लेकिन 22 जनवरी को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग नहीं लेंगे।

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि वह केंद्र सरकार से नाराज नहीं हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर अफ़सोस जताया कि राम मंदिर के उद्घाटन समारोह के निमंत्रण में उन्हें एक सहयोगी के साथ शामिल होने के लिए कहा गया था।

उन्होंने कहा कि शंकराचार्यों की धार्मिक और आध्यात्मिक श्रेष्ठता के बावजूद उन्हें मंदिर के ‘गर्भगृह’ में जगह नहीं दी जाती और उन्हें बाहर रहने का निर्देश दिया जाता है।

ज्ञात रहे कि चारों शंकराचार्यों के 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले राम ​मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल न होने की खबरें आ चुकी है। (AK)

 

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