पैलेट गन के विकल्प के लिए समिति का गठनः राजनाथ सिंह
कांग्रेस नेता नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि कश्मीर में हिंसा को को रोकने के लिए जिन पैलेट बंदूकों से फायरिंग की जा रही है उससे लोग अंधे हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में हिंसा को रोकने के लिए जो पैलेट बंदूक प्रयोग की जा रही है वह लोगों को अंधा कर रही है। कांग्रेसी नेता की बात का जवाब देते हुए भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पैलेट गन का प्रयोग प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए किया जा रहा है।
कहते हैं कि पैलेट बंदूक से एक बार फायर होने से सैकड़ों छर्रे निकलते हैं जो रबर और प्लास्टिक के होते हैं। इनकी रेंज 50 से 60 मीटर होती है। ये जहां-जहां लगते हैं उससे शरीर के हिस्सों पर भारी चोट लगती है। छर्रे जब शरीर के अंदर जाते हैं तो काफी दर्द तो होता है। पैलेट गन से घायल लोगों को पूरी तरह ठीक होने में कई दिन लग जाते हैं। पैलेट बंदूक़ के छर्रे अगर आंख में लग जाएं तो वे काफी घातक होते हैं। इनसे आंखों की रौशनी जा सकती है। पैलेट के छर्रे आंख में घुस जाते हैं और आंख के टिश्यू को धीरे-धीरे ख़राब करने लगते हैं जिसके परिणाम स्वरूप आंख की रौशनी जाती रहती है।
श्रीनगर के महाराजा हरि सिंह हॉस्पिटल में पैलेट गन से घायल 92 लोगों का ऑपरेशन किया जा चुका है। डॉक्टरों के अनुसार पैलेट गन के छर्रों की चोटें इतनी ख़तरनाक हैं कि लगता है अब घायलों आंख की रोशनी कभी वापस नहीं आएगी।
कश्मीर में हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा पैलेट गन से जख़्मियों की भारी संख्या को देखते हुए भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा है कि हम विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेंगे। यह समिति देखेगी कि पैलेट गन के विकल्प के तौर पर कौन से ग़ैर घातक हथियार लाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।