भारत में चरमपंथ से संघर्ष पर धर्मगुरुओं का बल
भारत में विभिन्न धर्मों के नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा करते हुए सरकार से मांग की है कि वह देश में विभिन्न धर्मों के मानने वाले सभी लोगों की सुरक्षा के लिए अधिक प्रयास करे।
इरना की रिपोर्ट के अनुसार हिंदू, मुसलमान, ईसाई और अन्य धर्मों के अनेक नेताओं व धर्मगुरुओं ने नई दिल्ली के इस्लामी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित होने वाले शांति व मानवता नामक सम्मेलन में अल्पसंख्यकों और दलितों पर चरमपंथी हिंदुओं के हमलों की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यवाहियों से भारतीय समाज में खाई बढ़ेगी और देश की सहनशील संस्कृति को नुक़सान पहुंचेगा।
भारत की जमाते इस्लामी के प्रमुख मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने इस सम्मेलन में समाज पर अशांति के कुप्रभावों की ओर संकेत करते हुए कहा कि आर्थिक, राजनैतिक व सामाजिक प्रगति के लिए शांति व सुरक्षा पहली शर्त है। भारतीय ईसाइयों की परिषद के महासचिव जाॅन दयाल ने इस सम्मेलन में कहा कि एक इंसान होने के नाते सभी लोग सम्मान के पात्र हैं और विशेष धर्म के समर्थन के बहाने निर्दोष लोगों पर हमला नहीं किया जाना चाहिए। एक सामाजिक कार्यकर्ता राम पनियानी ने भी कहा कि कुछ लोग अल्पसंख्यकों पर हमला करके, भारत में मतभेद फैलाने और फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। (HN)