कश्मीर बंद से जनजीवन अस्त-व्यस्त
भारत नियंत्रित कश्मीर में बंद के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा।
श्रीनगर से हमारे संवाददाता के अनुसार कश्मीर घाटी में शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी अलगाववादियो के आह्वान पर बंद का व्यापक असर रहा। कश्मीर घाटी में शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी अलगाववादियो के आह्वान पर बंद का व्यापक असर रहा।
कश्मीर के अधिकांश क्षेत्रों में सभी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। सड़कों पर इक्का-दुक्का निजी वाहनों के अलावा कोई सार्वजनिक वाहन दौड़ता नज़र नही आया। बंद के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का उचत प्रबंध किया है।
कश्मीर घाटी में 9 फरवरी से बंद का सिलसिला जारी है। अलगाववादियों ने 9 फरवरी को संसद हमले के आरोपी अफ़ज़ल गुरू की बरसी पर बंद का आह्वान किया था। शनिवार 11 फरवरी को हुर्रियत कांफ्रेंस ने जेकेएलएफ के संस्थापक मकबूल बट की बरसी पर कश्मीर बंद का आह्वान कर रखा है। मकबूल बट को 11 फरवरी 1984 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।
कश्मीरी नेताओं मीरवाइज़ मौलवी उमर फारुक़ और सईद अली शाह गिलानी सहित सभी प्रमुख नेताओं को पहले ही नज़रबंद कर दिया है जबकि यासीन मलिक को शनिवार को हिरासत में लेने के बाद श्रीनगर की सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 8 जून को भारतीय सुरक्षाबलों के हाथों हिज़बुल मुजाहेदी के एक कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद कश्मीर में तनाव का क्रम लगातार चला आ रहा है।