भारत द्वारा हथियारों की ख़रीद और उसके दुष्परिणाम
स्टाकहोम इन्टरनेश्नल पीस रिसर्च सेंटर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत, हथियार ख़रीदने वाले देशों में अग्रणी देश बन गया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत ने हथियार ख़रीदने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। अमरीकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत, संसार में हथियार ख़रीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। पहले नंबर पर सऊदी अरब है। भारत ने सन 2008 से 2015 के बीच 34 अरब डालर के हथियार ख़रीदे हैं। इस प्रकार वर्तमान समय में भारत विश्व में शस्त्र आयात करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है। भारत ने सन 2012 से 2016 के बीच अकेले 13 प्रतिशत हथियार ख़रीदे हैं। एसआईपीआरआई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने इस दौरान हथियारों के आयात में 43 प्रतिशत वृद्धि की है।
हांलाकि रूस के साथ भारत के सामरिक संबन्ध रहे हैं और वह भारत की सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करता आया है किंतु हालिया वर्षों में भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार ने घोषणा की है कि हथियारों की विदेशी कंपनियों को विशेष सुविधाएं देकर वे सैन्य उत्पादनों में तेज़ी से वृद्धि के पक्षधर हैं।इसी बीच पश्चिम, भारत से हथियारों पर प्रतिबंधों को हटाकर नई दिल्ली को अधिक से अधिक हथियार बेच रहे हैं ताकि चीन के मुक़ाबले में भारत को मज़बूत किया जा सके।
भारत एेसी स्थिति में हथियारों की ख़रीद मे वृद्धि कर रहा है कि जब हर प्रकार के विकास के बावजूद इस देश के लगभग 30 प्रतिशत लोग निर्धन रेखा के नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि भारत में करोड़ों लोगों ने अभी विकास का स्वाद चखा ही नहीं है। भारत के कई प्रांतों में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में कमी के कारण वहां पर सामाजिक असमानता बढ़ रही है। राजनैतिक टीकाकारों के अनुसार आर्थिक क्षेत्र में मोदी सरकार के क्रियाकलापों से जनता में असहमति पाई जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में विकास का जो नारा दिया था उसे वह पूरा करने में अक्षम रही है जो जनता के बीच भाजपा और मोदी के विरोध का कारण बना है।