माओवादियों से संबंध होने पर विक्लांग प्रोफ़ेसर को उम्र क़ैद की सज़ा
-
दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफ़ेसर साई बाबा को मंगलवार 7 मार्च 2017 को गढ़ चिरौली अदालत जाते हुए
दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक विक्लांग प्रोफ़ेसर जी एन साईबाबा को देशद्रोह के इल्ज़ाम में उम्र क़ैद की सज़ा सुनायी गयी है।
संवाददाता के अनुसार, महाराष्ट्र के गढ़ चिरौली की एक अदालत ने प्रोफ़ेसर साईबाबा के साथ जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के छात्र हेम मिश्रा, पत्रकार प्रशांत राही और 3 अन्य लोगों को यूएपीए क़ानून के तहत देशद्रोह के मामले में दोषी पाया था। साईबाबा और दूसरे आरोपियों पर माओवादियों के साथ कथित रूप से संबंध होने और भारत के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने के आरोप साबित हुए हैं। अदालत ने साईबाबा सहित 5 लोगों को उम्र क़ैद और एक दोषी को 10 साल क़ैद की सज़ा सुनायी है।
हेम मिश्रा और प्रशांत राही 2013 में गिरफ़्तार हुए थे जिनके पास से आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद होने का दावा किया गया था। इन लोगों से पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान साई बाबा का नाम सामने आया था।
प्रोफ़ेसर साई बाबा को मई 2014 में उनके दिल्ली आवास से गिरफ़्तार किया गया था।
साई बाबा दिल्ली यूनिवर्सिटी के राम लाल आनंद कालेज में अंग्रेज़ी के अध्यापक थे। साई बाबा 90 फ़ीसद विकलांग हैं। (MAQ/N)