सीरिया में 4 सेफ ज़ोन बनाने का महत्व
अभी हाल ही में कज़ाकिस्तान के "अस्ताना" शहर में हुई सीरियन शांति वार्ता के दैरान सीरिया में 4 सेफ ज़ोन बनाने का फैसला लिया गया। ये 4 सेफ ज़ोन उन क्षेत्रों में बनाई जाएंगी जहाँ पर सबसे भीषण लड़ाई चल रही है।
ये 4 सेफ ज़ोन सीरिया के कुल 14 प्रान्तों में से 8 प्रान्तों में स्थित होगा। पहले ज़ोन में उत्तर-पश्चिम के शहर जैसे इदलिब, और हमा, लताकिया, अलेप्पो के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया है। दूसरे ज़ोन में हमा शहर का उत्तरी भाग, तीसरे ज़ोन में राजधानी दमिश्क के पास "गोता" शहर और चौथे ज़ोन में डारा और कुनैत्रा प्रान्तों को शामिल किया गया।
इन 4 सेफ ज़ोन में युद्ध विराम लागू करवाने की ज़िम्मेदारी संयुक्त रूप से रूस, ईरान और तुर्की ने ली है। इन 4 सेफ ज़ोन में शांति स्थापित करने के लिए सीज़फायर लागू कार्रवाई जायेगी। इस संधि के तहत केवल तथाकथित विद्रोही ही आएंगे, अल-नुस्रा फ्रंट और दाइश के आतंकवादी इस संधि का हिस्सा नहीं होंगे और उन के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखी जायेगी।
अस्ताना में अगले दौर की वार्ता मध्य जुलाई में होने की संभावना है। सेफ ज़ोन बनाने का असली उद्देश्य ये है कि अगर इन इलाक़ों में लड़ाई बन्द हो जाती है तो सीरियन सेना व् उसके समर्थक और रुसी वायुसेना अल-नुस्रा फ्रंट और इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के ख़िलाफ़ लड़ाई पर अपना ध्यान फोकस कर पाएंगे।
अमेरिकी वायुसेना की मदद से सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ ने "तबक़ा" शहर को आतंकवादियों के चुंगल से आज़ाद करा लिया है और अब रक्क़ा शहर की तरफ़ बढ़ रहे हैं। इस युद्ध के ख़त्म होने के बाद जिसका जितने अधिक क्षेत्र पर कब्ज़ा होगा वह उतनी ही अधिक मज़बूती से वार्ता की टेबल पर बैठेगा।
इसलिए सीरियन आर्मी यह चाहती है कि वो भी आतंकवादियों द्वारा पिछले 3 साल से घेरे गये शहर "दैरुज़्ज़ूर" और उसके आसपास के क्षेत्र को जल्द से जल्द आज़ाद करा के अपनी स्थिति को मज़बूत करे, यह संभव तभी हो सकता है जब बाकि क्षेत्रों में सीज़फायर हो जिससे सीरियन सेना अपने सैनिकों को दूसरे फ्रंटों पर भेज पाये।
अगर प्रस्तावित सेफ ज़ोनों में शांति वार्ता का सम्मान किया जाता है तो आने वाले दिनों में निश्चित रूप से रुसी वायुसेना की मदद से सीरियन सेना और उसके समर्थकों द्वारा दाइश और नुस्रा फ्रंट जैसे आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान शुरू किया जा सकता है।
(लेखकः अभिमन्यु_कोहाड़)
(नोटः लेखक के निजी विचार से पार्स टूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं।)