घाटी में कर्फ़्यू के बावजूद जनप्रदर्शन, दर्जनों घायल
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भारत प्रशासित कश्मीर के सबसे बड़े अलगाववादी संगठन हिज़्बुल मुजाहेदीन के सक्रिय कमान्डर सबज़ार बट, उनके एक साथी और एक आम आदमी की हत्या की याद में अलगाववादी दलों की अपील पर दूसरे दिन भी बंद के कारण आम जन जीवन अस्त-व्यस्त रहा वहीं प्रशासन ने भी श्रीनगर के 7 थाना क्षेत्रों सहित घाटी के ज़्यादातर क्षेत्रों में घोषित व अघोषित कर्फ़्यू लगाया था जिसके कारण भी सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त रहा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May २९, २०१७ १४:३६ Asia/Kolkata
  • 26 मई 2017 को श्रीनगर में जुमा नमाज़ के बाद प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस की ओर पत्थर फेंकने के लिए दौड़ते हुए
    26 मई 2017 को श्रीनगर में जुमा नमाज़ के बाद प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस की ओर पत्थर फेंकने के लिए दौड़ते हुए

भारत प्रशासित कश्मीर के सबसे बड़े अलगाववादी संगठन हिज़्बुल मुजाहेदीन के सक्रिय कमान्डर सबज़ार बट, उनके एक साथी और एक आम आदमी की हत्या की याद में अलगाववादी दलों की अपील पर दूसरे दिन भी बंद के कारण आम जन जीवन अस्त-व्यस्त रहा वहीं प्रशासन ने भी श्रीनगर के 7 थाना क्षेत्रों सहित घाटी के ज़्यादातर क्षेत्रों में घोषित व अघोषित कर्फ़्यू लगाया था जिसके कारण भी सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त रहा।

श्रीनगर से संवाददाता के अनुसार, प्रशासन का कहना है कि उसने आम नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए कर्फ़्यू लगाया और सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए।  

इस बीच अलगाववादी दलों के आह्वान पर कर्फ़्यू के बावजूद इन हत्याओं के ख़िलाफ़ विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किए। प्रदर्शन के दौरान जनता और पुलिस के बीच झड़प हुयी, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए हैं। जबकि पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कोई बड़ी घटना नहीं घटी। प्रशासन का कहना है कि पथराव की छह घटनाएं हुयी हैं, किन्तु कोई बहुत बड़ी घटना नहीं घटी और किसी की हत्या नहीं हुयी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा बल को संयम से काम लेने का आदेश दिया गया है।

ग़ौरतलब है कि श्रीनगर के 7 थाना क्षेत्रों, दक्षिणी कश्मीर के सभी इलाक़ों, और कुपवारा, गांदरबल, पुलवामा, बारहमोला और सोपोर में भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।

कश्मीर की मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए राज्य प्रशासन ने एक बार फिर अलगाववादियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही शुरु कर दी है। प्रशासन ने एक ओर सय्यद अली शाह गीलानी और मीर वाएज़ उमर फ़ारूक़ को उनके घरों में नज़रबंद कर दिया है तो दूसरी ओर अलगाववादी के ख़िलाफ़ क्रेकडाउन भी शुरू कर दिया है। मोहम्मद यासीन मलिक को श्रीनगर के सेंट्रल जेल भेज दिया गया है जबकि अलगाववादी दलों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी शुरु हो गयी है।

दूसरी ओर भारतीय सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर घाटी में पत्थर के बजाए गोलियां चलतीं तो पता चलता कि सेना क्या करती, सभी अलगाववादी गुटों ने खेद प्रकट करते हुए विश्व के सभी बड़े देशों, संयुक्त राष्ट्र संघ और मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे घाटी की स्थिति की समीक्षा करें और बिपिन रावत के बयान का नोटिस लें।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का यह न्योता है कि कश्मीर के लोग हथियार उठाएं, फिर उनका मुक़ाबला किया जाएगा, जिससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि कश्मीरियों का जातीय सफ़ाया हो रहा है। (MAQ/N)