आतंकवादी संदीप शर्मा और अमरनाथ यात्रा पर हमला
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दुनिया भर के आतंकवादी गुटों में ऐसे लोग बड़ी संख्या में मिलते हैं जो यह दावा करते हैं कि वह अपना धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार कर चुके हैं।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Jul १२, २०१७ १६:०३ Asia/Kolkata
  • आतंकवादी संदीप शर्मा और अमरनाथ यात्रा पर हमला

दुनिया भर के आतंकवादी गुटों में ऐसे लोग बड़ी संख्या में मिलते हैं जो यह दावा करते हैं कि वह अपना धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार कर चुके हैं।

ज्ञात रहे कि अलक़ायदा का उप प्रमुख आदम यहिया ग़दन पहले एक अमरीकी ईसाई था और उसका असल नाम एडम परलिन था। इस आदमी ने अलक़ायदा की आतंकवादी कार्यवाहियों में बढ़ चढ़कर भाग लिया किन्तु बाद में कहीं ग़ायब हो गया और फिर अमरीकियों ने एक ड्रोन हमले में उसकी मौत का दावा करके मामले को ही ख़त्म कर दिया।

इसी प्रकार इराक़ और सीरिया का क्रूर जॉन जेहादी भी पहले ईसाई था वह भी ख़ूब ख़ून बहाकर कहीं ग़ायब हो गया। इसी प्रकार नाइजीरिया की एक पूर्व ईसाई महिला जो श्वेतवर्ण विधवा क नाम से प्रसिद्ध हुई और अपनी क्रूरता को इस्लाम से जोड़ती रही। मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड डेविड हेडली भी एक यहूदी मां का बेटा था। भारत में भी मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस, अजमेर की दरगाह, मालेगांव में मुसलमानों की जानें लेकर इन धमाकों का आरोप मुसलमानों पर ही थोपने की एक गहरी साज़िश की जा चुकी है किन्तु आतंकवादियों का दुर्भाग्य था कि वह हेमंत करकरे की जांच के दायरे में आ गये और पकड़े गये किन्तु कश्मीर में लश्करे तैबा के लिए काम करने वाले आतंकवादी संदीप शर्मा की गिरफ़्तार की ख़बर सामने आने के बाद कश्मीर में चल रहे आतंकवाद को एक नया रंग मिला है।

क्या कोई इस बात पर विश्वास करेगा कि जिस मुज़फ़्फ़रनगर में दर्जनों मुसलमानों की जान सांप्रदायिक दंगों में गयी, उसी मुज़फ़्फ़रनगर के एक ब्रहमण के दिल में इस्लाम की ऐसी तथाकथित मुहब्बत जागी कि वह अपनी जान जोखिम में डालकर कश्मीर में आतंकवादियों की बांहों में बाहें डालकर कश्मीर की सुरक्षा पर तैनात मुस्लिम सिपाहियों की जानें लेने को अपने नये धर्म का भाग समझने लगा? यह दावा बड़ा हस्यासपद है कि एक ब्रहमण के पुत्र को इस्लाम से इतनी मुहब्बत हो गयी कि वह इस्लाम के नाम पर ग़ैर इस्लामी हरकतें करने वालों के कंधों पर रखकर बंदूक़ चलाने लगा। हमे तो मामला यूं भी कुछ उलझा हुआ लगता है कि दिन में चैनलों पर तो सब से बड़ी ख़बर संदीप शर्मा की गिरफ़्तारी की थी किन्तु शाम होते ही अमरनाथ से वापस आ रहे यात्रियों पर हमले की ख़बर हर चैनल पर छा गयी। कुछ ही क्षण में सब संदीप शर्मा को ही भूल गये और दूसरे दिन के समाचारपत्रों में जो ख़बर सुर्ख़ी बनने वाली थी वह ख़बर कहीं पीछे ढकेल दी गयी और हर जगत केवल यात्रा की चर्चा होने लगी।

हमें तो लगता है कि एक हिंदु आतंकवादी को साथ लेकर काम करने के समाचारों को दबाने के लिए ही लश्करे तैबा के आतंकवादियों ने शाम को निहत्थे और बेबस श्रद्धालुओं को निशाना बनाया। हम तो निरंतर कहते आए हैं कि आतंकवादियों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है, यह लोग अपनी गतिविधियां जारी रखने के लिए इस्लाम के दुश्मनों से पैसा और हथियार लेने को उपासना समझते हैं, दनिया में आप कहीं भी आतंकवादियों पर नज़र डालिए तो उनके माथे पर आपको सजदों के गहरे निशान मिलेंगे किन्तु उनकी जेबों में इस्लाम के दुश्मनों द्वारा प्रदान की गयी दौलत मिलेगी।

आतंकवादियों की असलियत यह है कि वह उन ही एजेन्सियों से मदद लेते हैं जिनको वह इस्लाम का दुश्मन कहते हैं। दाइश का ज़ायोनी और अमरीकी कनेक्शन, दुनिया पर स्पष्ट हो चुका है, तालेबान को गठित करने की स्वीकारोक्ति अमरीकी अधिकारी कई बार कर चुके हैं तो हम यह कैसे मान लें कि कश्मीर के आतंकवादी किसी इस्लाम दुश्मन शक्ति से अंदर ही अंदर मिले हुए नहीं हैं?

जब इस्लामी ख़िलाफ़त का दावा करने वाला अबू बक्र अलबग़दादी अमरीका और इस्राईल का एजेन्ट निकला तो फिर किसी भी आतंकवादी गुट को इस्लाम से संबंधित कैसे माना जा सकता है? कश्मीर में आतंकवादियों ने अपने अपराधों पर पर्दा डालने के लिए अमरनाथ यात्रा पर जो कायराना हमला किया है, उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। वास्तव में कश्मीरी आतंकवादी इस प्रकार की कार्यवाही करके पूरे देश में हिंदु मुस्लिम दंगे भी करवाना चाहते हैं किन्तु सच तो यह है कि निर्दोष लोगों को मारने वाले आतंकवादियों को न तो अल्लाह माफ़ करेगा और न पैग़म्बरे इस्लाम की शिफ़ाअत प्राप्त होगी, इन सबका ठिकाना केवल और केवल नरक है जिसकी आग को आतंकवादियों की प्रतीक्षा में फ़रिशते और अधिक भड़का रहे हैं।

साभार

शकील हसन शम्सी

“लेखक के विचारों से पार्स टूडे का सहमत होना आवश्यक नहीं है”