क्या पाकिस्तान-भारत संबंध बहाल हो सकते हैं?
पाकिस्तान और भारत 70वां यौमे आज़ादी मना रहे हैं तो एक लम्हे के लिए उन्हें आत्ममंथन भी ज़रूर करना चाहिए। दोनों के संबंधों की कहानी टकराव और लड़ाई का एक लंबा इतिहास पेश करती है।
दोनों देशों की आज़ादी के समय के पीड़ादायक हालात आज भी लोगों के मन में ताज़ा हैं। दोनों के बीच शांति और अपेक्षाकृत सुकून के हालात भी कभी कभी आए जिसके नतीजे में पानी के बंटवारे की संधि हुई। क्या यह दोनों देश सामान्य संबंध स्थापित कर सकते हैं?
कश्मीर दोनों देशों के बीच विवाद की सबसे बड़ी जड़ है। राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शासन काल के दौरान कुछ अच्छी प्रगति भी हुई थी। यदि वर्ष 2007 का पाकिस्तान का न्यायपालिका संकट न उभरता और दो साल का समय और मिल जाता तो अच्छी प्रगति हो सकती थी। मगर इस समय दोनों देशों के बीच आपसी संबंच बहुत निचली सतह पर पहुंच गए हैं। जब उड़ी सेक्टर पर छापामारों ने हमला किया तो मोदी सरकार ने पाकिस्तान से हर प्रकार की वार्ता रोक दी और पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को इस हमले का ज़िम्मेदार ठहराया। नई दिल्ली सरकार कश्मीर में पथराव करने वाले युवाओं का सेना के हाथों बर्बर दमन पूरी तरह भूल जाती है। मोदी सरकार और भाजपाई नेता अपनी शर्तों पर पाकिस्तान बात करना चाहते हैं। पाकिस्तान भी अपने उलझावों में व्यस्त है और जब कोई ढंग का प्रस्ताव आएगा तो उस पर बात करेगा। लेकिन दोनों परमाणु देशों को यह याद रखना चाहिए कि वह तनाव को हवा दे रहे हैं। वार्ता से नए अवसरों का रास्ता खुलता है और वार्ता न हो तो रिस्क बढ़ता रहता है। कई स्तरों पर संचार के साथ कभी कभी उच्च स्तर पर संपर्क शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। परमाणु धमकियों के बारे में तो सोचना भी ग़लत है।
वर्तमान तनाव में मीडिया वाइल्ड कार्ड है। मीडिया को चाहिए कि वह आग पर तेल डालने के बजाए उसे शांत करने की कोशिश करे।
चीन के उदय और रूस के पुनः उभार के बाद अंतर्राष्ट्रीय शक्ति संतुलन नया रूप ले रहा है। अमरीका की सुपर पावर की हैसियत को चुनौती मिल रही है। मध्यपूर्व से हमारे क्षेत्र को पाठ लेना चाहिए।
जब भारत और पाकिस्तान अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस बना रहे हैं तो मैं दोनों देशों को दो पवित्र नदियों के रूप में देखता हूं जिनका उद्गम एक है। दोनों विपरीत दिशा में बह रही हैं लेकिन दोनों का संबंध समान उपमहाद्वीप से है और हमेशा बहती रहेंगी।
रेयाज़ मोहम्मद ख़ान
लेखक पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं।