क्या वास्तव में आतंकवादियों का धर्म नहीं होता?
https://parstoday.ir/hi/news/india-i53697-क्या_वास्तव_में_आतंकवादियों_का_धर्म_नहीं_होता
एक ज़माने से सुनते आ रहे हैं कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता। इसका मतलब यह हुआ कि आतंकवादी अधर्मी होते हैं? किन्तु एक कटु सच्चाई यह है कि अधिकतर मामले में आतंकवाद धर्म के नाम पर हुआ है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec १०, २०१७ १६:०० Asia/Kolkata
  • क्या वास्तव में आतंकवादियों का धर्म नहीं होता?

एक ज़माने से सुनते आ रहे हैं कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता। इसका मतलब यह हुआ कि आतंकवादी अधर्मी होते हैं? किन्तु एक कटु सच्चाई यह है कि अधिकतर मामले में आतंकवाद धर्म के नाम पर हुआ है।

बीसवीं शताब्दी के आरंभ से इस्राईल के गठन तक, यहूदियों ने मुसलमानों को आतंक का निशाना बनाया, जिसके परिणाम में फ़िलिस्तीनियों ने भी आतंकवाद के माध्यम उसका जबवा देने का प्रयास किया। ईसाइयों ने परमाणु बम गिराकर बौद्ध धर्म के मानने वालों को आतंकवाद में ग्रस्त करके जापान को हथियार डालने पर मजबूर कर दिया। भारत में सिखों ने ख़ालिस्तान के गठन के लिए आतंकवाद का सहारा लिया, तमिलनाडु से संबंध रखने वाले हिन्दुओं ने श्रीलंका से लेकर भारत तक आतंकवाद का नंगा नाच दिखाया।

बाबरी मस्जिद की शहादत का बदला लेने के लिए मुंबई में कुछ मुसलमानों ने बम धमाके किए तो कश्मीर अलगावादियों ने भी बंदूक़ और बम के ज़ोर पर अपने लिए एक अलग राज्य स्थापित करने का प्रयास किया। अफ़ग़ानिस्तान में रूस को पराजित करने के लिए तालेबानी आतंकवादियों ने मुजाहेदीन का वेश बदलकर अत्याचार आरंभ कर दिया और फिर उनके अत्याचारों का क्रम अनंत होता चला गया। इधर हमारे देश में भी पाकिस्तान की सहायता से कट्टरपंथी मुसलमानों ने कुछ दूसरे आतंकवादी गुट बिना लिए और फिर कुछ समय बाद भगवा आतंकवाद का क्रम आरंभ हुआ और फिर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के नेतृत्व में हिंदु आतंकवादियों का एक गुट निकला और उसने बेगुनाहों के ख़ून से अपने हाथ रंगीन किए।

उधर मध्यपूर्व, नाइजीरिया, सोमालिया और पश्चिमी देशों में धर्म के नाम पर जूनूनियों ने अपना ख़ूनी खेल दिखाना शुरु किया किन्तु उन सबको कामयाबी इसलिए नहीं मिली कि जिस धर्म से भी उनका संबंध था उसी धर्म के लोगों ने उनकी खुलकर निंदा की किन्तु यह भी सच है कि आतंकवादी गुटों ने हमेशा बहुत ही गर्व के साथ इंसान का ख़ून बहाया और बात यहां तक पहुंच गयी कि लोगों के गले काटने के, उनको ज़िंदा जलाने के और उनको डुबाकर मारने के वीडियो बहुत गर्व के साथ पोस्ट करना शुरु कर दिए किन्तु हमारा भारत इस प्रकार की हरकतों से पाक था, यहां हिंदुओं का एक गुट आतंक में लिप्त पाया गया तो लोगों ने इसपर पर्दा ही डालने का प्रयास किया। बार बार यही कहा कि यह काम हिंदु नहीं कर सकते, बार बार कहा गया कि कांग्रेस की सरकार ने फंसा दिया है किन्तु राजस्थान के राजसमंद क्षेत्र में एक हिन्दु आतंकवादी शंभू भवानी ने जो आतंकवादी वीडियो जारी किया है उसको देखकर यह बात निश्चित हो गयी कि अब भारत में भी दाइश, लश्कर, जैश, तहरीके तालेबान जैसी मानसिकता रखने वाले कट्टरपंथी हिन्दु पैदा हो गये हैं जो इंसानों की गर्दनें काटने और ज़िंदा जलाने को अपने लिए गर्व का कारण समझते हैं।

हमारे ख़्याल में जब किसी भी धर्म की बुनियादों पर हमला करना होता है तो उसके अंदर बैठे उसके दुश्मन ऐसी हरकतें करते हैं। वैसे राजस्थान में एक मुस्लिम मज़दूर अफ़राज़ को जंगल में धोखे से बुलाकर शंभू भवानी के हाथों बेदर्दी से मारे जाने वाला वीडियो, कोई पहला ऐसा वीडियो नहीं है जिसमें किसी निहत्थे की जान ली जा रही है। इससे पहले कई जगहों पर गोरक्षकों के हाथों मवेशियों के व्यापारी की पिटाई और मारे जाने के दर्दनाक वीडियो जारी हो चुके हैं, भीड़ के हमलों का शिकार होने वालों के वीडियो ही जारी हुए हैं किन्तु राजस्थान के हालिया वीडियो और पहले के वीडियोज़ में अंतर यह है कि उनको किसी से अचानक ही बना लिया था किन्तु इस वीडियो को शूट करने के लिए आतंकवादी ने पहले पूरा प्रबंध किया था और एक एक पल का वीडियो बनाने के लिए एक नाबालिग़ लड़के की सेवा हासिल की थी।

वास्तव में इस हत्यारे को लगता था कि इस प्रकार के वीडियो देखकर सारे भारत के मुस्लिम आतंक में ग्रस्त हो जाएंगे किन्तु उसको यह पता नहीं है कि यह जाति अत्याचारों की आग में झुलसती नहीं है बल्कि तप कर और निखरती है। खेद की बात तो यह है कि सरकार बिल्कुल चुप है और मीडिया को राजनैतिक लोगों पर कीचड़ उछालने के अतिरिक्त कोई काम नहीं है किन्तु एक आम आदमी यह केवल सोच रहा है कि यही घिनौनी हरकत यदि किसी मुसलमान ने की होती तो क्या मीडिया और सरकार का रवैया ऐसा ही होता?

साभार

शकील शम्सी