अलगाववादी नेताओं के ख़िलाफ़ एनआईए की चार्जशीट के बाद कश्मीर में तनाव
भारत की जांच एजेंसी एनआईए द्वारा गुरुवार को कश्मीरी आलगाववादी नेताओं और उद्योगपतियों के विरुद्ध चार्जशीट दाख़िल किए जाने के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
श्रीनगर से हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार एनआईए द्वारा चार्जशीट दाख़िल किए जाने के बाद कश्मीर के आलगाववादी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ के निवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार ताक़त के बल पर अलगाववादियों की ज़बान को बंद करना चाहती है।
संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ और मोहम्मद यासीन मलिक ने कहा कि भारतीय जांच एजेंसी ने जैसे ही जांच शुरू की थी वैसे ही भारत के मीडिया ने चिल्लाना शुरू कर दिया था कि जैसे हम कोई मुजरिम हों और अब सबकुछ कश्मीर में समाप्त होने जा रहा है।
उमर फ़ारूक़ ने कहा कि जिन लोगों के ख़िलाफ़ एनआईए ने चार्जशीट दाख़िल की है उसमें इस जांच एजेंसी को कुछ भी नहीं मिला है। जबकि मीडिया और भारत सरकार के कुछ अधिकारी यह अफ़वाह फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि एनआईए को अलगाववादियों के विरुद्ध सुबूत मिले हैं तो ऐसा कुछ नहीं है। मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा झूठ फैलाकर भारत सरकार आलगाववादियों के ख़िलाफ़ साज़िश कर रही है ताकि वह हमारी ज़बान पर ताला लगा सके।
मोहम्मद यासीन मलिक और मीर वाइज़ उमर फ़ारुक़ ने कहा कि हम दिल्ली सरकार को यह बता देना चाहते हैं कि हम इस तरह के षड़यंत्रों से डरने वाले नहीं हैं। दोनों अलगाववादी नेताओं ने कहा कि कश्मीर एक विवाद है जबतक इसे सुलझाया नहीं जाएगा कश्मीरी जनता अपना विरोध जारी रखेगी। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे कश्मीर में भारत की सेना और अलग-अलग एजेंसियों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ अवाज़ उठाएं और कश्मीरी जनता को उनका हक़ दिलाने में साथ दें। (RZ)