जिन्ना नहीं यह भारतीय नेता थे विभाजन के ज़िम्मेदार, फारूक अब्दुल्लाह
अपने बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुक़ अब्दुल्लाह ने कहा है कि नयी दिल्ली न कश्मीर को समझती है और न ही कश्मीर के मुद्दों को।
उन्हों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मध्य विभाजन का खतरा बढ़ रहा है। फारूक़ अब्दुल्लाह ने एक सेमिनार में भाषण के दौरान कहा कि कश्मीर में हालात खराब हो रहे हैं और लोगों को धर्म के नाम पर बांटना वर्तमान समय की सब से बड़ी चुनौती है जो वास्तव में नयी दिल्ली में सत्ता में बैठे लोगों की सब से बड़ी नाकामी है।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर ही नहीं पूरे देश में हालात , काबू से बाहर हो रहे हैं, अगर कहीं सेक्यूलरिज़्म है तो वह कश्मीर में है जहां बहुसंख्यक 70 प्रतिशत हैं, एक वह समय था जब कश्मीरी पंडित, मुस्लिम और सिख, सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जम्मू पहुंचे और जम्मू ने अपने दरवाज़े खोल दिये और उनका स्वागत किया लेकिन आज हालात बदल गये।
फारुक़ अब्दुल्लाह ने कहा कि आज जम्मू एक तरफ तो कश्मीर दूसरी ओर जा रहा है, हिन्दु यह कह रहे हैं कि मुसलमान देश के दुश्मन हैं और मुसलमान, हिन्दुओं के साथ रहने पर चिंतित हैं और वह अब अलग देश की मांग कर रहे हैं, यह वह देश नहीं नज़र नहीं आ रहा है जिस की ब्रिटेन से आज़ादी के लिए सब लोगों ने मिल कर लड़ाई लड़ी थी।
भारत के विभाजन का उल्लेख करते हुए फारुक़ अब्दुल्लाह ने कहा कि लोग मुहम्मद अली जेनाह को को विभाजन का ज़िम्मेदार समझते हैं लेकिन हक़ीक़त में एक कमेटी ने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए सिफारिशें की थीं जिस पर मुहम्मद अली जेनाह, विभाजन की मांग से पीछे हट गये थे और यह जवाहर लाल नेहरू, मौलाना आज़ाद और सरदार पटेल थे जिन्होंने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए की गयी सिफारिश को लागू करने के बजाए विभाजन को हवा दी।
उन्होंने कहा कि अगर इन तीन नेताओं ने गलती न की होती तो आज पाकिस्तान और बांग्लादेश न होता। (Q.A.)