भगवा आतंकियों की धमकी के बाद “आसिफ़ा” के पिता ने छोड़ा कठुवा
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कश्मीर में 8 वर्षीय बच्ची के बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में भगवा आतंकियों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार आसिफ़ा के परिवार वालों को लगातार कट्टरपंथी हिन्दू गुटों की ओर से धमकियां मिल रही हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr १५, २०१८ १६:२७ Asia/Kolkata
  • भगवा आतंकियों की धमकी के बाद “आसिफ़ा” के पिता ने छोड़ा कठुवा

कश्मीर में 8 वर्षीय बच्ची के बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में भगवा आतंकियों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार आसिफ़ा के परिवार वालों को लगातार कट्टरपंथी हिन्दू गुटों की ओर से धमकियां मिल रही हैं।

रविवार को जम्मू के कठुआ से मिली सूचना के मुताबिक़ शनिवार देर रात भगवा आतंकियों और कुछ कट्टरपंथी हिन्दू गुटों की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के बाद बच्ची के बलात्कार और उसकी हत्या से पीड़ित परिवार के सभी सदस्यों के साथ आसिफ़ा के पिता, कठुआ छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं।

कश्मीर से हमारे संवाददाता ने बताया है कि 8 वर्षीय आसिफ़ा जिसकी बलात्कार के बाद बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, इस घटना के मीडिया में आने और पूरे भारत में इस भयानक घटना के विरुद्ध जनता में बढ़ रहे आक्रोश ने बलात्कार के आरोपियों का समर्थन करने वाले कट्टरपंथी हिन्दू गुटों को बैकफुट पर ला दिया है। इसबीच पूरे भारत से आसिफ़ा के लिए इंसाफ़ की मांग बढ़ने से भगवा आतंकी क्रोधित हो गए हैं और उन्होंने अब आसिफ़ा के परिवार वालों को ही जान से मारने की धमकियां देना शुरू कर दिया है।

8 वर्षीय आसिफ़ा के साथ हुए बर्बरतापूर्ण यौन शोषण और उसकी हत्या के बाद आसिफ़ा के पिता और परिवार के अन्य सदस्य भी अब भगवा आतंकियों के आतंक से सुरक्षित नहीं रह गए हैं। कश्मीर से प्राप्त हो रही सूचना के मुताबिक़ कट्टरपंथी हिन्दू गुटों और भगवा आतंकियों ने आसिफ़ा के पिता और उसके परिवार के सदस्यों को कठुआ छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। आसिफ़ा के पिता अमजद अली ने बताया कि हम अपने पूरे परिवार के साथ 110 किलोमीटर की दूरी तय करके उधमपुर आए हैं।

उधमपुर पहुंचे आसिफ़ा के पिता अमजद अली ने बताया कि भगवा आतंकियों के कारण अब कठुआ में हमारा परिवार सुरक्षित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि जब मेरी मासूम बेटी के साथ बलात्कार हुआ और उसकी हत्या हुई तो मैं समझा कि यह केवल कुछ ही लोगों का काम है, लेकिन जब उन जानवरों के समर्थन में रैलियां निकाली जाने लगीं, बलात्कारियों और हत्यारों की आज़ादी की मांग होने लगी तब पता चला कि हम अकेले हैं और बलात्कारियों के साथ हज़ारों लोग हैं।

अमजद अली ने कहा कि हम पहले ही एक बेटी से वंचित हो चुके हैं,  अब जीवन में कभी कठुआ नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ उसको केवल मानवीय दृष्टि से देखा जाना चाहिए न कि उसपर राजनीति होनी चाहिए। (RZ)