जस्टिस रंजन गोगोई बने भारत के मुख्य न्यायाधीश
भारत में जस्टिस रंजन गोगोई ने चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया की शपथ ले ली है।
जस्टिस रंजन गोगोई को राष्ट्रपति कोविंद ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जस्टिस गोगोई भारत के उन चार जजों में से एक हैं जिन्होंने प्रेस कान्फ़्रेन्स करके मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ बयान दिया था और देश के लोकतंत्र के ख़तरे में होने की बात कही थी।
जस्टिस गोगोई ने बुधवार को देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। जस्टिस रंजन गोगोई का संबंध देश के पूर्वोत्तरी इलाक़े से है और इस इलाक़े से पहली बार कोई जज देश का मुख्य न्यायाधीश बना है। जस्टिस गोगोई इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जज रह चुके हैं। जस्टिस गोगोई नवम्बर 2019 तक चीफ़ जस्टिस रहेंगे।
जस्टिस रंजन गोगोई के पिता केशब चंद्र गोगोई वर्ष 1982 में छोटे से कार्यकाल के लिए असम के मुख्यमंत्री बने थे। पांच भाई बहनों में रंजन गोगोई के बड़े भाई अंजन गोगोई एयर मार्शल रह चुके हैं।
ज्ञात रहे कि हाल ही में गोगोई ने तीन अन्य वरिष्ठतम जजों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है क्योंकि चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा कुछ ख़ास मामलों की सुनवाई के लिए चुने हुए लोगों को नियुक्त कर रहे थे। इन लोगों ने ये चेतावनी दी कि लोकतंत्र ख़तरे में है।
जस्टिस गोगोई इस समय सुप्रीम कोर्ट के उन 11 न्यायाधीशों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक कर दिया है। उनकी संपत्ति, जेवर और नकदी से जुड़ी जानकारी बताती है कि वह कितना साधारण जीवन जीते हैं। उनके पास एक कार भी नहीं है। उनकी मां और असम की मशहूर समाजसेवी शांति गोगोई ने उन्हें कुछ संपत्ति मिली है जो कि उनके पास मौजूद हैं। इसके साथ ही संपत्ति से जुड़ी जानकारी में कोई भी बदलाव आने के बाद वे उसे घोषित भी करते हैं।