बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए दिल्ली में धरना
भारत में ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद की शहादत अर्थात 6 दिसंबर की तारीख़ के मद्देनज़र विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो चुका है।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार भारत में ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद के उसके स्थान पर पुनर्निर्माण के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शनों का क्रम आरंभ है। इस बीच “ऑल इंडिया तंज़ीमे उलमाए हक़” ने 5 दिसंबर को दिल्ली में एक विशाल विरोध-प्रदर्शन का अह्वान किया है। इस विशाल प्रदर्शन का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार पर इस बात का दबाव बनाया जा सके कि बाबरी मस्जिद को जितनी जल्दी हो सके फिर से उसका पुनर्निर्माण आरंभ हो।
ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद पुनर्निर्माण संस्था के अध्यक्ष यूनूस सिद्दीक़ी ने हमारे संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद न केवल भारत के बल्कि दुनिया के सभी मुसलमानों की आस्था से जुड़ी हुई है और यह ऐसा मुद्दा है कि मुसलमान कभी इससे पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद की शहादत का दिन भारत के इतिहास का सबसे काला दिन था। सिद्दीक़ी ने कहा कि बाबरी मस्जिद की शहादत इस बात का कारण बनी है कि आज इस महान देश की गंगा-जमुनी संस्कृति दाव पर लग गई है और पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हो रही है।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हिन्दुओँ के इस देश में राम मंदिर बनाने से कोई नहीं रोक सकता।
उल्लेखनीय है कि 6 दिसंबर वर्ष 1992 को कट्टरपंथी हिन्दुओं ने दिन दहाड़े बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया था। तात्कालीन सरकार ने बाबरी मस्जिद को शहीद करने वालों के ख़िलाफ़ और मस्जिद के पक्ष में एक प्रस्ताव भी पारित किया था, जिसमें मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया गया था, लेकिन अबतक किसी भी सरकार ने मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए कोई क़दम नहीं उठाया है, जबकि दूसरी ओर मस्जिद को एक बार शहीद करने वाले और इस ख़तरनाक अत्याचार के अपराधी एक बार फिर मस्जिद के स्थान पर मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं जबकि भारत की सर्वोच्च अदालत में बाबरी मस्जिद का मामला विचाराधीन है लेकिन उसके बावजूद कट्टरपंथी हिन्दू सुप्रीम कोर्ट सहित देश के संविधान का लगातार अपमान कर रहे हैं। (RZ)