आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में ईरान-भारत की आपसी सहयोग में रूचि
राष्ट्रपति रूहानी ने चाबहार बंदरगाह को तेहरान-नई दिल्ली के बीच व्यापक सहयोग का प्रतीक बताते हुए कहा कि ईरान भारत के साथ आपसी रूचि के क्षेत्रों में संबंधों में विस्तार का स्वागत करता है।
डॉक्टर हसन रूहानी ने शनिवार को तेहरान में भारत के नए राजदूत जी धर्मेन्द्र के प्रत्यय पत्र को स्वीकार करते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों को बहुत व्यापक बताते हुए कहा कि ऊर्जा की परियोजनाओं में सहमतियों के क्रियान्वयन और तेहरान-नई दिल्ली के बीच दीर्घकालिक सहमतियों को अंतिम रूप देना संयुक्त संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के मार्ग में मूल्यवान क़दम है।
ईरानी राष्ट्रपति ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष में सभी क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग को ज़रूरी बताते हुए उम्मीद जतायी कि नई दिल्ली-इस्लामाबाद क्षेत्र के दो अहम पड़ोसी देश के नाते शांति और दोस्ताना संबंध क़ायम करने के मार्ग में हमेशा क़दम उठाएंगे।
उन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को मज़बूत बनाने में तेहरान की नई दिल्ली के साथ सहयोग में विस्तार की तत्परता दर्शायी।
तेहरान में भारत के नए राजदूत जी धर्मेन्द्र ने इस अवसर पर कहा कि नई दिल्ली तेहरान के साथ आपसी रूचि के सभी क्षेत्रों में पहले से ज़्यादा संबंध विस्तार में रूचि रखता है।
उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कि चाबहार में ईरान-भारत के बीच सहयोग तेज़ रफ़्तार से जारी है, कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी आयी है और व्यापारिक लेन-देन में राष्ट्रीय मुद्रा के उपयोग से, सहयोग की प्रक्रिया पहले से ज़्यादा मज़बूत हुयी है।
भारतीय राजदूत ने भी आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में दोनों देशों के बीच सहयोग के मज़बूत होने की इच्छा प्रकट की। (MAQ/N)