2019 का चुनाव भारतयी मुसलमानों के लिए कितना महत्वपूर्ण!!!
भारत में चुनाव जबसे जातीय समीकरणों के आधार पर होने लगे हैं तबसे इस देश में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का महत्व बढ़ गया है और इसके जहां कई कारण हैं वहीं एक मुख्य कारण जात-पात भी है।
वैसे मैं अपने लेख में इतिहास का ज़्यादा उल्लेख नहीं करता हूं और इसका भी एक कारण है और वह यह है कि मैं इतिहास में जा कर अपने समय और लेख के पढ़ने वाले पाठकों के वक़्त को बर्बाद नहीं करना चाहता। इसका अर्थ यह बिल्कुल न निकाला जाए कि मैं इतिहस विरोधी हूं, क्योंकि मुझे इतिहास पसंद है और उसको पढ़ता भी हूं लेकिन यह जो समय है उसमें हर दिन इतनी घटनाएं घटित हो रही हैं जो किसी इतिहास से कम नहीं है और मैं भी यही चाहता हूं कि आज की घटने वाली घटनाओं को ही आधार बनाकर आपसे बात करुं ताकि आप मेरी बात को आसानी से समझ सकें विशेषकर आज के युवा जिनके पास समय कम है और वह कम शब्दों में बहुत बातें जानना चाहते हैं।
अब बात करते हैं कि भारतीय चुनाव में मुसलमानों के महत्व की। इसके कई उत्तर हो सकते हैं। पहला उत्तर यह कि मुसलमान कुछ पार्टियों के लिए केवल वोट बैंक हैं। दूसरे एक पार्टी के लिए इस देश का मुसलमान ऐसा हथियार हैं जिसको वह पार्टी, अपने वोटरों को दिखा कर उन्हें डराती है और फिर उनसे वोट लेती है। तीसरे एक पार्टी ऐसी भी है जिसको वोट देना इस देश के मुसलमानों की मजबूरी बनती जा रही है क्योंकि यह पार्टी इस देश में मुसलमानों पर बढ़ते अत्याचारों के आईने को मुसलमानों को दिखाकर उन्हें डरा रही है। इस बीच कुछ पार्टियां तो मुसलमानों के नाम पर ही हैं लेकिन उनका दायरा अभी बहुत सीमित है। इन सभी बातों को देखकर आप यही कह सकते हैं कि मुसलमानों का चुनाव में महत्व अब बहुत कम होता जा रहा है और जिनके लिए है भी तो केवल वोट के लिए है जिससे उन्हें कुछ सीटों पर जीतने में थोड़ा सी मदद मिल जाती है।
ऐसा नहीं है कि भारत में मुसलमानों की संख्या बहुत कम है और उनका इस देश में होने वाले चुनाव में कोई महत्व ही नहीं है। भारतीय मुसलमानों का इस देश में होने वाले हर चुनाव में बहुत ही महत्व है और हमेशा रहेगा लेकिन आज जो हालात हैं उनमें भारतीय मुसलमानों के महत्व को कम करके दिखाया जा रहा है। वैसे इसमें जहां पार्टियों की ग़लती है वहीं इस देश के मीडिया तंत्र का बहुत बड़ा हाथ हैं और सबसे ज़्यादा अगर कोई दोषी है तो स्वयं भारत का मुसलमान, जिसने अपने अस्तित्व को किसी और पर निर्भर कर दिया और ख़ुद किसी एक पार्टी का कार्यकर्ता बनकर ख़ुश हो गया।
ऐसा क्या हुआ कि भारत में रहने वाले करोड़ों मुसलमान धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में अपना महत्व ही खोते जा रहे हैं। इसके भी कई कारण हैं सबसे बड़ा कारण इस समय भारत के मुसलमानों के पास राष्ट्रीय स्तर पर कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो उनका नेतृत्व कर सके। दूसरे मुसलमानों को राष्ट्रवाद, आतंकवाद और इसी तरह के कई अन्य मुद्दों में उलझा दिया जा रहा है कि जिसके कारण वे भारतीय चुनाव में केवल किसी ऐसी पार्टी या उम्मीदवार को ढूंढते हैं कि जिसके कारण वे अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकें। इन सब में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस देश की कई छोटी बड़ी पार्टियों में कई मुसलमान नेता हैं जिनका इन पार्टियों में क़द भी कोई कम नहीं हैं लेकिन वे अपने क़द और अपने वजूद को बचाए रखने के लिए ही इतने प्रयास करते रहते हैं। उन्हें यह याद ही नहीं रहता कि वह किस समुदाय से हैं और उनके प्रति उनकी क्या ज़िम्मेदारी है?
यह सब हो गए सवाल अब भारत का मुसलमान ऐसा क्या करे कि जिसके सहारे इस देश का मुसलमान अपनी खोई हुई ताक़त और महत्व को फिर से प्राप्त कर सके। मेरी नज़र में सबसे पहले भारत के मुसलमानों को एक प्लेटफ़ार्म पर आना होगा, आपस में एकता का प्रदर्शन करना होगा, भारत के मुसलमानों को अपना एक नेतृत्व चुनना होगा और इन सबके साथ 2019 के आगामी चुनाव में एक साथ किसी एक पार्टी को चुनकर अपनी शर्तों पर सत्ता के सिंहासन पर बैठाना होगा ताकि इस देश में राजनीति करने वाली हर पार्टी को यह एहसास हो जाए कि अगर भारत को महान देश बनाना है तो मुसलमानों के बिना बनाना संभव नहीं है। भारत एक बहुसंख्यक देश है जिसमें अलग-अलग धर्म, समुदाय, जात और भाषा बोलने वाले लोग एक साथ मिलकर रहते हैं जिनकी एकता के साथ यह देश दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश बन सकता है। (रविश ज़ैदी)