अमेरिका के ख़िलाफ़ एकजुट हुए भारत और चीन, जानें कहां और क्यों?
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एशिया महाद्वीप की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, भारत और चीन किसी मुद्दे पर एकमत हों, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। दोनों देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा पाई जाती है जिसका कारण एशिया में चीन की बढ़ती ताक़त को भारत से मिल रही चुनौती है, लेकिन अमेरिका ने एकतरफ़ा ट्रेड वॉर छेड़कर दोनों देशों को एकजुट कर दिया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १४, २०१९ १६:१० Asia/Kolkata
  • अमेरिका के ख़िलाफ़ एकजुट हुए भारत और चीन, जानें कहां और क्यों?

एशिया महाद्वीप की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, भारत और चीन किसी मुद्दे पर एकमत हों, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। दोनों देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा पाई जाती है जिसका कारण एशिया में चीन की बढ़ती ताक़त को भारत से मिल रही चुनौती है, लेकिन अमेरिका ने एकतरफ़ा ट्रेड वॉर छेड़कर दोनों देशों को एकजुट कर दिया है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, सोमवार से विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 22, विकासशील और सबसे कम विकसित सदस्य देशों की बैठक शुरू हुई। भारत ने इस दो दिवसीय बैठक में व्यापारिक मुद्दों पर सदस्य देशों की एकतरफ़ा कार्रवाई से संबंधित क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। चीन और दक्षिण अफ़्रीका, भारत के इस क़दम के समर्थन में सामने आए हैं। इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा का एक प्रमुख बिंदु यह है कि यह विकासशील देशों के लिए विशेष प्रावधान हैं जिसे विशेष और विभेदकारी व्यवहार (स्पेशल ऐंड डिफरेंशल ट्रीटमेंट) कहा जाता है। इसके तहत विकासशील देशों को समझौतों और वादों को लागू करने के लिए अधिक समय मिलता है और साथ ही, इसमें उनके व्यापारिक हितों की सुरक्षा के प्रावधान भी हैं।

दूसरी ओर व्यापारिक मुद्दे पर भारत और चीन का एकमत होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। व्यापारिक मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' की पॉलिसी से चीन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है और दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक बातचीत के सकारात्मक दिशा में जाने का कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर (करीब 395 अरब रुपये) मूल्य की आयातित वस्तुओं पर ड्यूटी बेनिफिट्स हटाकर भारत को भी व्यापारिक झटका दिया है। यूएस ट्रेड सेक्रटरी विल्बर रॉस ने अपने हालिया दिल्ली दौरे में भारत पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर अन्यायपूर्ण तरीक़े से आयात शुल्क लगाता है। बहरहाल, अमेरिका की एकपक्षीय कार्रवाई के ख़िलाफ़ बहुपक्षीय एकजुटता से भारत और चीन फ़ायदे में रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन में जो मुद्दे फंसे हैं, उनमें भारत और चीन की दो-दो शिकायतें प्रमुख हैं। भारत ने लोहा और स्टील के आयात पर अमेरिका द्वारा सेफगार्ड ड्यूटीज़ लगाए जाने के आदेश को चुनौती दी है। एक अन्य मामले में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा (रीन्यूएबल एनर्जी) पर अमेरिकी कार्यवाहियों को चुनौती दी है। वहीं, चीन ने अमेरिका द्वारा अधिक टैरिफ़ लगाए जाने के ख़िलाफ़ डब्ल्यूटीओ में शिकायत की है। साथ ही, चीन ने कुछ स्टील प्रॉडक्ट्स पर अमेरिका द्वारा ड्यूटी बढ़ाने के फ़ैसले को चुनौती दी है। यह दुर्लभ मामलों में एक है जिसमें भारत, चीन और यूरोपीय संघ एक साथ अमेरिका के मुक़ाबले में खड़े हैं। (RZ)