कोरोना की वैक्सीन के लिए अभी कीजिए इन्तेज़ार
कोरोना की वैक्सीन बनाने में एक साल का समय लग सकता है।
भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण को रोकने वाली वैक्सीन के बनने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है।
फरीदाबाद स्थित ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक गगनदीप कंग के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी को हराने के लिए विस्तार और गति के हिसाब से वैश्विक शोध और विकास प्रयास बेहद बेमिसाल हैं। किंतु इस बारे में कोई भी वैक्सीन एक साल से पहले बनना मुश्किल है। उनका कहना है कि किसी भी वैक्सीन को तलाशने के बाद उसे सुरक्षित, प्रभावी और बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने के लिए कम से कम एक साल का समय अवश्य लगेगा। केरल के राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर ई. श्रीकुमार और हैदराबाद के सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायलॉजी के निदेशक राकेश मिश्रा भी मानते हैं कि किसी वैक्सीन को तैयार करने में कई साल का समय लगता है। उनके अनुसार परीक्षण के विभिन्न स्तरों को पार करने और उसके बाद मंजूरी मिलने में लगने वाले समय के चलते इस साल कोरोना वायरस की वैक्सीन उपलब्ध होना संभव नहीं है। संसार के कई अन्य वैज्ञानक भी यह कह चुके हैं कि कोरोना का वैक्सीन उपलब्ध कराने में निश्चित रूप में समय लगेगा।
कोरोना वायरस या कोविड-19 का संक्रमण वैश्विक स्तर पर 19 लाख से ज्यादा लोगों को पीड़ित कर चुका है। कोरोना के कारण विश्व में 1 लाख 26 हज़ार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।