एक नज़रे करम इन मुरझाती कलियों पर, बर्बाद होते बचपन पर..
भारत नियंत्रित कश्मीर में कोविड-19 से बच्चों को मानसिक समस्याओं का सामना है जहां अब तक बच्चों की समस्या के 300 केसेज़ रिपोर्ट हुए हैं।
भारत नियंत्रित कश्मीर में कोरोना की महामारी के साथ साथ बच्चों में मानसिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी अनंतनाग में 14 वर्षीय बच्चा समस्याओं का शिकार था जिसकी हालत कोविड-19 के बाद और बिगड़ गयी है।
ज्ञात रहे कि कश्मीर में अब तक 4500 कोरोना वायरस केसेज़ रिपोर्ट हुए हैं जबकि 19 लोग मारे गये हैं।
मनोचिकित्सक फ़रहाना यासीन का कहना था कि बच्चों में वायरस से पीड़ित होने की सोच जन्म ले रही है जिसकी वजह से डिप्रेशन का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वायरस के ख़ौफ़ से वह अपने हाथों को निरंतर धोता रहता था और महामारी से संबंधित ख़बरें देखता था।
रिपोर्ट के अनुसार 14 वर्षीय लड़का जब मार्च में कश्मीर में पहला केस सामने आया तो इस ख़बर से बेचैन हो गया था। उन्होंने हाथ धोने और ख़बरें देखने के अतिरिक्त ख़ुद को आइसोलेशन में रखा हुआ था किन्तु सबसे अधिक समस्या उस समय हुई जब उन्हें दर्द होने लगा और उन्हें कोविड-19 से संक्रमित होने का एहसास होने लगा।
डाक्टरों की ओर से मानसिक समस्याओं में ग्रस्त होने वाले बच्चों की संख्या में निरंतर वृद्धि पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
ज्ञात रहे कि भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर में लाकडाउन लागू कर दिया था जिसकी वजह से बच्चों को पहले मानसिक समस्याओं का सामना था।
रिपोर्ट के अनुसार श्री महाराजा हरि अस्पताल में यूनीसेफ़ के अधीन चलने वाले चाइल्ड गाइडनेंस सेन्टर में सैकड़ों बच्चों को भर्ती करा दिया गया है।
मनोचिकित्सक फ़रहाना यासीन ने कहा कि जब से कोविड-19 शुरु हुआ है तब से लेकर अब तक लगभग 300 केसेज़ को मानसिक समस्या समझकर उपचार दिया गया जिनमें से 90 प्रतिशत टेलीफ़ोन द्वारा और 10 प्रतिशत को सीधे सेशन्ज़ में मदद की गयी। (AK)