प्रधानमंत्री के क़रीबी, कश्मीर के एलजी ने दिया इस्तीफ़ा
भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल जीसी मुर्मू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
मुर्मू का इस्तीफा ऐसे दिन आया, जब जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त किए जाने का एक वर्ष पूरा हुआ है।
हाल ही में मुर्मू ने बयान दिया था कि घाटी में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल की जा सकती है.
जब इस बयान को आधार बनाकर जम्मू कश्मीर में 4जी सेवाओं को बहाल करने की दलील दी गई तो केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उपराज्यपाल के इस बयान को सत्यापित करने की ज़रूरत है।
बीते जुलाई में ही चुनाव आयोग ने भी मुर्मू के जम्मू कश्मीर के चुनाव संबंधी उनके बयानों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव होने के समय को लेकर मीडिया में कुछ बयान दिए थे।
इस पर आयोग का कहना था कि संवैधानिक प्रावधानों में चुनावों का समय आदि तय करने के लिए केवल चुनाव आयोग ही अधिकृत है। इस प्रकार के बयान आयोग को मिले संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने के समान हैं।
जीसी मुर्मू ने पिछले साल 29 अक्टूबर को इस केंद्र शासित प्रदेश के प्रथम एलजी के रूप में कार्यभार संभाला था। मुर्मू के इस्तीफे के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
उल्लेखनीय है कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब मुर्मू ने उनके प्रधान सचिव के रूप में सेवाएं दी थीं। वह उपराज्यपाल के पद पर नियुक्ति के समय वित्त मंत्रालय में सचिव थे। (AK)
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