कृषि सुधार विधेयकों को लेकर भारत में किसानों का व्यापक प्रदर्शन
भारतीय संसद द्वारा खेती से जुड़े महत्वपूर्ण सुधार विधेयकों की मंज़ूरी के विरोध में किसानों ने शुक्रवार को आंदोलन किया।
आन्दोलनकारी किसान, इन विधेयकों को वापस लेने की मांग कर रहे थे। किसानों के इस आन्दोलन का प्रभाव पंजाब और हरियाणा में सबसे ज्यादा देखने को मिला। आज शुक्रवार को सुबह से ही किसान रेलवे ट्रैक पर आकर बैठ गए। उन्होंने कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन किये। रेल रोको प्रदर्शन को किसान मजदूर संघर्ष समिति ने आहूत किया। बाद में अलग-अलग किसान संगठनों ने इसे अपना पूरा समर्थन दिया।
शुक्रवार को बहुत बड़ी संख्या में किसानों ने ट्रैक्टर और बाइक पर सवार होकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे को जाम कर दिया। इसके बाद इन किसानों ने दिल्ली का रुख किया लेकिन नोएडा एंट्री पॉइंट पर भारी संख्या में तैनात पुलिस फोर्स ने उन्हें नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर रोक लिया जिसके बाद किसान वहीं पर नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। हालांकि किसानों के इस आन्दोलन का प्रभाव सबसे अधिक पंजाब और हरियाणा में दिखाई दिया किंतु यह आन्दोलन भारत के अन्य राज्यों में भी किया गया।
किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि इन कृषि विधेयकों के ज़रिये न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा और वे बड़े पूंजीपतियों की दया पर निर्भर हो जाएंगे। किसानों को इस बात का भी भय है कि सरकार इन अध्यादेशों के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की स्थापित व्यवस्था को खत्म कर रही है। एसे में यदि इसे लागू किया जाता है तो किसानों को व्यापारियों के रहम पर ही जीना पड़ेगा।
दूसरी ओर भारत की केन्द्र सरकार इन अध्यादेशों को ऐतिहासिक कृषि सुधार का नाम दे रही है। सरकार का कहना है कि वह, कृषि उपजों की बिक्री के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था बना रही है।