किसान आंदोलन, अब निजी कंपनियों के गोदामों की ख़ैर नहीं!
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किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि अगर तीनों विवादित कृषि क़ानून सरकार ने वापस नहीं लिया तो किसान आंदोलन की अगली कार्यवाही के तहत कुछ निजी कंपनियों के गोदामों को निशाना बनाया जाएगा।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Mar १८, २०२१ १२:३१ Asia/Kolkata
  • किसान आंदोलन, अब निजी कंपनियों के गोदामों की ख़ैर नहीं!

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि अगर तीनों विवादित कृषि क़ानून सरकार ने वापस नहीं लिया तो किसान आंदोलन की अगली कार्यवाही के तहत कुछ निजी कंपनियों के गोदामों को निशाना बनाया जाएगा।

तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन को 100 दिन से ज़्यादा हो चुके हैं। यह आंदोलन पिछले साल नवंबर में शुरू हुआ है। भारतीय किसान यूनियन बीकेयू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने केन्द्र सरकार से क़ानून वापस लेने की मांग करते हुए साफ़ तौर पर कहा है कि अगर तीनों क़ानून वापस न लिए गए तो निजी कंपनियों को गोदामों को निशाना बनाएंगे।

गुरूवार को अबोहर से 40 किलोमीटर दूर श्रागंगानगर में संयुक्त किसान मोर्चा एसकेएम की अपील पर बुलाई गयी किसान महापंचायत में राकेश टिकैत ने कहा कि निजी कंपनियों ने नए क़ानून के मद्देनज़र बड़े-बड़े गोदाम बनवाए और अनाज इकट्ठा करना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि केन्द्र की राजग सरकार ऐसा क़ानून लाने जा रही है जिससे दूध, बिजली, खाद्य और मोटर वाहन की मार्केटिंग कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में चली जाएगी।

राकेश टिकैत ने युवाओं को किसानों के आंदोलन की ज़िम्मेदारी लेने और खेती की ओर रुख़ करने और अपने लिए रोज़गार पैदा करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मीडिया कर्नाटक, तमिलनाडु, और देश के अन्य हिस्सों में किसान आंदोलन की ख़बर नहीं दिखा रहा है, लेकिन हम सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों तक पहुंचेंगे।

साथ ही उन्होंने बताया कि 15-20 दिनों में ओडिशा और मध्यप्रदेश में एमएसपी ख़रीद आंदोलन शुरू होने वाला है।(MAQ/N)

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