पड़ोसियों के साथ संबन्ध हमारी स्ट्रैटेजी हैः इब्राहीम रईसी
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सैयद इब्राहीम रईसी का कहना है कि ईरान के भीतर पाई जाने वाली क्षमताओं का पड़ोसियों के साथ आदान-प्रदान किया जाना चाहिए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec ११, २०२१ २०:०६ Asia/Kolkata
  • पड़ोसियों के साथ संबन्ध हमारी स्ट्रैटेजी हैः इब्राहीम रईसी

सैयद इब्राहीम रईसी का कहना है कि ईरान के भीतर पाई जाने वाली क्षमताओं का पड़ोसियों के साथ आदान-प्रदान किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने बताया है कि प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने और उनको निष्क्रिय बनाने के उद्देश्य से पड़ोसियों के साथ संबन्ध, इस्लामी गणतंत्र ईरान की स्ट्रैटेजी है।

सैयद इब्राहीम रईसी ने शनिवार को विदेशों में निर्धारित ईरान के प्रतिनिधियों के साथ भेंट में पड़ोसी देशों पर ध्यान केन्द्रित करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ईरान के भीतर पाई जाने वाली क्षमताओं के दृष्टिगत पड़ोसी देशों के साथ आदान-प्रदान को बढ़ाया जा सकता है।  राष्ट्रपति ने कहा कि इस काम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका विदेश मंत्रालय की है।

उन्होंने अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों को निष्क्रिय बनाने के लिए दो रणनीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग कहते थे कि ईरान वार्ता नहीं करेगा।  कुछ का यह दावा था कि ईरान वार्ता में गंभीरता से भाग नहीं लेगा या फिर उसके पास इस बारे में कोई कार्यक्रम नहीं है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि ईरान ने वार्ता में पूरी दिलचस्पी के साथ भाग लिया और प्रस्ताव पेश करके दिखा दिया कि वह इस बारे में कितना गंभीर है।

ईरान के राष्ट्रपति का कहना है कि अगर सामने वाला पक्ष, प्रतिबंधों को हटाने में वास्तव में गंभीर है तो फिर अच्छा समझौता हो सकता है।  उनका कहना था कि इस्लामी गणतंत्र ईरान भी अच्छा समझौता चाहता है।

अपने संबोधन के दूसरे भाग में ईरान के राष्ट्रपति ने अवैध ज़ायोनी शासन के साथ क्षेत्र के कुछ देशों द्वारा संबन्ध सामान्य करने की आलोचना की।  उन्होंने कहा कि यह काम न तो इन देशों के लिए और न ही ज़ायोनी शासन के लिए सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता।

रईसी ने कहा कि ईरान, पड़ोसी देशों का हितैषी है।  उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ संबन्ध और संपर्क, क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकता है।

ईरान के राष्ट्रपति का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान की समस्याओं का संबन्ध वहां पर विदेशियों की मौजूदगी की वजह से है।  उनका कहना था कि अमरीका और नेटो के प्रवेश के बाद से अफ़ग़ानिस्तान ने शांति नहीं देखी।

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