ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य के संबंधों की विशेषता क्या है?
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विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान आज़रबाइजान गणराज्य के अधिकारियों से मुलाकात के उद्देश्य से बाकू पहुंच गये हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २२, २०२१ १३:५० Asia/Kolkata
  • ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य के संबंधों की विशेषता क्या है?

विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान आज़रबाइजान गणराज्य के अधिकारियों से मुलाकात के उद्देश्य से बाकू पहुंच गये हैं।

विदेशमंत्री एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बाकू पहुंच गये हैं जहां वह द्विपक्षीय संबंधों को विस्तृत करने के मार्गों और क्षेत्रीय परिवर्तनों के बारे में आज़रबाइजान के वरिष्ठ अधिकारियों से विचारों का आदान -प्रदान करेंगे। इससे पहले विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने विदेशमंत्री की बाकू यात्रा की सूचना दी थी।

ईरान का विदेशमंत्री बनने के बाद हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान की आज़रबाइजान गणराज्य की यह पहली यात्रा है।

ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य के विदेशमंत्रियों ने पहली बार इस्लामाबाद में इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी की बैठक से इतर मुलाकात की थी। उस मुलाकात में दोनों देशों के विदेशमंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों में बेहतर होने की प्रक्रिया पर प्रसन्नता जताई थी।

इसी प्रकार दोनों देशों के विदेशमंत्रियों ने इश्काबाद में भी ECO की बैठक से इतर एक दूसरे से भेंटवार्ता की थी और विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने उस भेंटवार्ता को रचनात्मक और मित्रतापूर्ण कहा था। विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहिया ने कहा था कि ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य के बीच संबंध दो पड़ोसी देशों से बढ़कर निकट संबंधी और पारिवारिक हैं। इसी प्रकार विदेशमंत्री ने कहा था कि पड़ोसियों के साथ संबंध विस्तार को जारी रखेंगे।

कुछ भ्रांतियों के बावजूद ईरान के विदेशमंत्री की बाकू यात्रा इस बात की सूचक है कि दोनों देशों के संबंध मधुरता की दिशा में अग्रसर हैं। हालांकि इस्लामी गणतंत्र ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य के संबन्ध कुछ समय के लिए तनावग्रसत हो गए थे किंतु दोनों देशों के अधिकारियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तनाव को अपने संबन्धों पर हावी नहीं होने दिया। 

कुछ कारणों से ईरान और आज़रबाइजान के संबन्ध विशेष महत्व के स्वामी हैं जिनमें से एक यह है कि दोनों मुसलमान देश हैं और उनके बीच एतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबन्ध हैं। 

इन दोनों के बीच जो संभावनाएं है वे उनके संबन्धों में विस्तार की पूरक हैं।  एक कारण यह भी है कि ईरान, परमाणु बिजलीघर के निर्माण में दक्षता रखता और स्थानीय तकनीक का स्वामी है और आज़रबाइजान को इसकी ज़रूरत है। 

पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाना और उनका समर्थन करना, ईरान की एक सिद्धांतिक नीति है।  इस आधार पर ईरान, अपने पड़ोसी देश आज़रबाइजान गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान व समर्थन करता है और इस देश को विभाजित करने वाले हर प्रयास का विरोधी है। 

आज़रबाइजान गणराजय में ईरान पूर्व राजदूत कहते हैं कि वास्तविकता यह है कि ज़ायोनी शासन हालिया परिवर्तनों का लाभ उठाकर ईरान तथा आज़रबाइजान गणराज्य के संबन्धों में तनाव पैदा करने की चेष्टा में है  परन्तु दोनों देश, षडयंत्रों और वास्तविकताओं को समझते हुए संबन्धों के बीच आने वाली बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। MM