ईरान की सैनिक ताक़त का लोहा मानने पर मजबूर हुआ अमरीका
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अमरीका की सेंट्रल कमांड के चीफ़ आफ़ स्टाफ़ पद के उम्मीदवार माइकल कोरीला ने मंगलवार को सेनेट की बैठक में कहा कि ईरान के पास आधुनिक सैन्य क्षमता है, प्राक्सी संगठनों का एक नेटवर्क है, वह अमरीका और उसके घटकों के ख़िलाफ़ ताक़त के इस्तेमाल का रुजहान रखता है इसलिए सेंट्रल कमांड की गतिविधियों के लिए सबसे बड़ा ख़तरा ईरान है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb ०९, २०२२ १०:२४ Asia/Kolkata

अमरीका की सेंट्रल कमांड के चीफ़ आफ़ स्टाफ़ पद के उम्मीदवार माइकल कोरीला ने मंगलवार को सेनेट की बैठक में कहा कि ईरान के पास आधुनिक सैन्य क्षमता है, प्राक्सी संगठनों का एक नेटवर्क है, वह अमरीका और उसके घटकों के ख़िलाफ़ ताक़त के इस्तेमाल का रुजहान रखता है इसलिए सेंट्रल कमांड की गतिविधियों के लिए सबसे बड़ा ख़तरा ईरान है।

अमरीका जनरल ने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और नौसेना की ताक़त ईरान की लगातार बढ़ती शक्ति के मुख्य स्तंभ हैं और ईरान के पास कम दूरी और मध्यम दूरी की मार करने वाले मिसाइल इलाक़े में अनेक लक्ष्यों के लिए ख़तरा उत्पन्न की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह दावा भी किया ज़मीन से हवा में मार करने वाले ईरानी मिसाइल अंतर्राष्ट्रीय वायु सीमा में अमरीका के जासूसी उपकरणों के लिए बड़ा ख़तरा हैं।

जनरल माइकल कोरीला की ओर से ईरान की सैनिक शक्ति के बारे में यह बयान ज़ाहिर करता है कि पश्चिमी देशों की ओर से ईरान पर कई दशकों से जारी पाबंदियां ईरान की रक्षा प्रगति को रोक नहीं सकीं और आज अमरीका को इस इलाक़े में अपनी विस्तारवादी योजनाएं और सैनिक गतिविधियां ख़तरे में नज़र आने लगी हैं।

ईरान पर अमरीका ने अपने घटकों की मदद से कठोर पाबंदियां लगा रखी हैं मगर ईरान क्षेत्रीय ताक़त बन चुका है और उसने साबित कर दिया है कि क्षेत्र के भीतर या बाहर से उत्पन्न होने वाले ख़तरे का मुक़ाबला करने में सक्षम है। अमरीका की हमेशा यह कोशिश रही कि ईरानोफ़ोबिया फैलाकर ईरान को पूरे इलाक़े के लिए गंभीर ख़तरे के रूप में पेश करे ताकि पश्चिमी एशिया और फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में अपनी सैनिक उपस्थिति का तर्क पेश करे और साथ ही इस इलाक़े के देशों को अमरीका से अरबों डालर के सैन्य डील के लिए तैयार करे। जबकि सच्चाई यह है कि इस इलाक़े में अमरीका की सैनिक उपस्थिति अस्थिरता और आतंकवाद की जड़ है।

जबकि इस्लामी गणतंत्र ईरान की रक्षा रणनीति प्रतिरोधक आयाम पर आधारित है। ख़तरों से ख़ुद को सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी था कि ईरान रक्षा उद्योग में प्रगति करता और ज़रूरत के रक्षा उपकरण तैयार करता। ईरान ने अपना रक्षा क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों पर बहुत काम किया और अलग अलग रेंज के मिसाइल बनाए। इन मिसाइलों से इस्राईल और अमरीका को गहरी चिंता है।

अमरीकी टीकाकार राबिन राइट का कहना है कि ईरान लंबी रेंज, सटीक निशाने और अधिक विध्वंसक शक्ति वाले मिसाइलों पर काम कर रहा है। अमरीका की रक्षा इंटैलीजेन्स एजेंसी ने कहा है कि ईरान के पास पश्चिमी एशिया में सबसे बड़ा मिसाइल भंडार है। ईरान की दूसरी बड़ी ताक़त असमान जंग की महारत है। ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स की नौसेना ने अनेक प्रकार की जंगी नौकाएं बनाकर फ़ार्स खाड़ी में अमरीका के मुक़ाबले में ख़ुद को काफ़ी मज़बूत कर लिया है। ईरान ने इसके साथ ही अलग अलग प्रकार के ड्रोन, एयर डिफ़ेन्स सिस्टम कई प्रकार के क्रूज़ मिसाइल बनाए हैं।

ईरान के एयर डिफ़ेन्स सिस्टम ने अमरीका का अत्याधुनिक ग्लोबल हाक ड्रोन को निशाना बनाकर अपनी ताक़त का प्रदर्शन कर दिया।

ईरान की रक्षा शक्ति में होने वाले इस विस्तार से अमरीकी सैनिक कमान की चिंताएं बढ़ गई हैं। अमरीकी सेंटकाम के उम्मीदवार के बयान से इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

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